Waqf (Amendment) Bill 2024 : केंद्र सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में ‘वक्फ संशोधन विधेयक, 2024’ और ‘मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024’ पेश किया। इस विधेयक का विरोध समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने किया। लोकसभा में इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए अखिलेश ने आरोप लगाया कि इस विधेयक के माध्यम से वक्फ बोर्ड में गैर-मुसलमानों को शामिल करने की साजिश रची जा रही है। उनका कहना था कि यह बिल तुष्टिकरण और कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से लाया गया है।
अखिलेश यादव ने किया विरोध
अखिलेश यादव ने विधेयक के खिलाफ अपना विरोध करते हुए कहा, “ये बिल जो इंट्रोड्यूस हो रहा है, बहुत सोची-समझी साजिश के तहत हो रहा है। वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम को शामिल करने का औचित्य क्या बनता है? इतिहास के पन्नों को पलटे होते, एक जिलाधिकारी थे, उन्होंने क्या किया ये हम सब जानते हैं। बीजेपी हताश और निराश है। अल्पसंख्यकों के अधिकार छीने जा रहे हैं।”
उनके इस बयान पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तुरंत ही पलटवार करते हुए कहा, “अखिलेश यादव आप इस तरह की गोलमोल बातें सदन में नहीं कर सकते। आप अध्यक्ष के अधिकारों के संरक्षक नहीं हैं।” इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी अखिलेश को चेतावनी देते हुए कहा, “हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि आसन पर, संसद की आंतरिक व्यवस्था पर कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।”
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “वक्फ बोर्ड का ये सब संशोधन भी बस एक बहाना है। रक्षा, रेल, नजूल भूमि की तरह जमीन बेचना निशाना है।”
अखिलेश यादव ने मांग की है कि सरकार वक्फ बोर्ड की जमीनों की बिक्री न होने की लिखित में गारंटी दी। उन्होंने भाजपा पर रियल एस्टेट कंपनी की तरह काम करने का आरोप लगाते हुए कहा, “भाजपा को अपने नाम में ‘जनता’ के स्थान पर ‘जमीन’ लिखकर नया नामकरण कर लेना चाहिए: भारतीय जमीन पार्टी।”


