Bharat Band : 21 अगस्त को अनुसूचित जातियों और जनजातियों के आरक्षण में उप-वर्गीकरण पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के विरोध में भारत बंद का आह्वान किया गया है। विभिन्न दलित और आदिवासी संगठनों ने इस बंद का आयोजन किया है, जिसमें उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) का भी समर्थन प्राप्त है। इसके अलावा, नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने भी इस बंद का समर्थन करते हुए भाग लेने की घोषणा की है।
यह भारत बंद उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में प्रभाव डाल सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में ये संगठन अपनी नाराजगी व्यक्त करना चाहते हैं, जिससे इस आंदोलन की व्यापकता बढ़ सकती है। बंद के दौरान प्रमुख शहरों में ट्रैफिक, परिवहन, और सरकारी सेवाओं में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। लोगों को इन संभावित समस्याओं से निपटने के लिए सावधान रहना चाहिए।
भारत बंद के दौरान परेशानी से बचने के सुझाव:
- सुरक्षित रहें: भारत बंद के दौरान बाहर जाने से बचें। यदि यात्रा आवश्यक हो, तो सुबह या शाम के समय करें जब बंद का प्रभाव कम हो सकता है।
- सभी आवश्यक वस्तुएं जुटा लें: खाने-पीने की वस्तुएं, दवाइयां, और अन्य जरूरी चीजें पहले से ही इकट्ठा कर लें ताकि बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े।
- सभी अद्यतन जानकारी प्राप्त करें: स्थानीय समाचार और प्रशासनिक अपडेट पर ध्यान दें, ताकि आप बंद के दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रह सकें।
- सुरक्षा उपाय अपनाएं: अगर बाहर निकलना जरूरी हो, तो अपने वाहन की सुरक्षा पर ध्यान दें और पार्किंग स्थानों को सुरक्षित रखें
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SC/ST आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला:
सुप्रीम कोर्ट ने एक अप्रैल को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण से संबंधित एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात जजों की पीठ ने 6:1 के बहुमत से निर्णय दिया कि राज्य सरकारों को SC/ST के भीतर उप-वर्गीकरण करने का संवैधानिक अधिकार है, ताकि उन जातियों को आरक्षण का लाभ दिया जा सके जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से अधिक पिछड़ी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने ‘ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश सरकार’ मामले में अपने 2004 के फैसले को पलट दिया। उस समय की पांच जजों की बेंच ने कहा था कि अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि वे स्वजातीय समूह हैं।
इस नए फैसले में, अदालत ने कहा कि राज्य संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 के तहत सामाजिक पिछड़ेपन की विभिन्न श्रेणियों की पहचान कर विशेष प्रावधान (जैसे आरक्षण) लागू कर सकते हैं। हालांकि, न्यायिक समीक्षा की जा सकती है यदि किसी विशेष जाति को अधिक आरक्षण देने का निर्णय लिया जाए।
अब राज्य सरकारों को यह अधिकार प्राप्त है कि वे अनुसूचित जाति और जनजातियों के आरक्षण में उप-वर्गीकरण कर सकें। वर्तमान में अनुसूचित जातियों को 15 फीसदी और अनुसूचित जनजातियों को 7.5 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है। राज्य सरकारें इन वर्गों के भीतर विशेष जातियों के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था कर सकती हैं।
फिलहाल, कई दलित-आदिवासी संगठन, अकादमिक जगत के लोग, और बहुजन समाज पार्टी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि अनुसूचित जातियों और जनजातियों को दिया गया आरक्षण उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए है, न कि इसे उप-वर्गीकरण के माध्यम से कमजोर करने के लिए। वे इसे आरक्षण समाप्त करने की साजिश मानते हैं, और इसी विरोध में 21 अगस्त को भारत बंद का आयोजन किया जा रहा है।


