BNS : देश में ‘लव जिहाद’ के मामलों पर व्यापक चर्चा हो रही है। इस विषय पर कानूनी बदलाव किए जाने के बाद अब भारतीय न्याय संहिता में इसे विशेषता से ध्यान देने की दिशा में कदम उठाया गया है। अब धार्मिक पहचान छिपाकर शादी करने या फिर गुमराह करने के मामलों में भारतीय न्याय संहिता के सेक्शन 69 में 10 साल की सजा का प्रावधान किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रुद्र विक्रम सिंह ने भी इस बारे में अपनी पुस्तक ‘दंड संहिता से न्याय संहिता तक’ में विस्तार से जानकारी दी है। उनके अनुसार, “शादी के नाम पर धोखेबाजी या पहचान छिपाकर शादी करने को अपराध घोषित किया गया है। इस संबंध में जो व्यक्ति धोखे से या महिला से शादी करने का वादा करके उसके साथ यौन संबंध बनाता है और बाद में मुकर जाता है, उसे 10 साल तक की सजा हो सकती है।”
इसके अलावा, रेप के मामलों में भी भारतीय न्याय संहिता में सुधार किए गए हैं। अब धारा 376 में रेप की परिभाषा तय की गई है और उसके लिए 10 साल से कम सजा नहीं होगी। इसे उम्रकैद तक बढ़ाया जा सकता है। विशेषतः, धारा 70 (2) में नाबालिग से रेप की सजा तय की गई है, जिसमें 16 साल से कम उम्र की लड़की से रेप करने पर 20 साल तक की सजा हो सकती है।
नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में भी मौत की सजा का प्रावधान है। इसे 12 साल से कम उम्र की नाबालिग से दुष्कर्म करने पर 20 साल तक की सजा या फिर मौत की सजा हो सकती है। रुद्र विक्रम सिंह के अनुसार, “भारतीय न्याय संहिता के लागू होने से सभी मामले तेजी से निपटे जाएंगे।
तीन साल से कम की सजा वाले मामलों में अब समरी ट्रायल की संभावना है, जिसमें पुलिस को 90 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल करनी होगी। अदालत भी चार्जशीट की समय सीमा को बढ़ा सकती है, यदि परिस्थितियों के आधार पर ऐसा आवश्यक समझे। इस प्रकार, कानूनी प्रक्रिया को समय-सारणी में प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे न्याय के लिए अधिक अनुकूल माहौल बनेगा।


