Jauhar University : उत्तर प्रदेश में आजम खान द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी को दी गई जमीन का पट्टा योगी आदित्यनाथ सरकार ने रद्द कर दिया है. इसके जवाब में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और शुक्रवार को इस पर सुनवाई हुई. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के फैसले को चुनौती देने वाला कोई भी आदेश जारी करने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस मामले पर सुनवाई को प्राथमिकता देने और तेजी लाने का आग्रह किया है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने यूनिवर्सिटी को 99 साल के लिए दी गई जमीन की लीज रद्द करने के यूपी सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी. समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान आजम खान ने रामपुर में मुर्तजा हायर सेकेंडरी स्कूल की इमारत सहित पूरा परिसर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को 99 साल की लीज पर आवंटित किया था। करीब 100 करोड़ की कीमत वाली 3825 वर्ग मीटर की इस प्रॉपर्टी के लिए करीब 100 रुपये सालाना किराया तय किया गया था.
पूरा मामला आजम खान और माध्यमिक शिक्षा विभाग के बीच एमओयू के जरिए हुए समझौते से शुरू हुआ. हालांकि, सरकार ने अब इस समझौते की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए लीज रद्द कर दी है. हालांकि मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित है इसलिए वहां सुनवाई में देरी हो रही है. इसके आलोक में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.
आजम खान द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी को दी गई जमीन का पट्टा रद्द करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जौहर ट्रस्ट को राहत नहीं दी. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई से इनकार करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई में तेजी लाने का आग्रह किया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जौहर यूनिवर्सिटी के वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि राज्य सरकार के फैसले से यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली 600 लड़कियों का भविष्य खतरे में पड़ गया है.
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