Lok Sabha 2024 : समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव (Lok Sabha 2024) के लिए सोमवार को अपनी दूसरी सूची जारी कर दी। इस लिस्ट में माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी को गाजीपुर से टिकट दिया गया है। अफजाल अंसारी के मैदान में उतरने से यहां कड़ा मुकाबला होने की संभावना पैदा हो गई है। सुभासपा ने उनके खिलाफ गाजीपुर से माफिया डॉन ब्रजेश सिंह को मैदान में उतारने की तैयारी कर ली है। यह घोषणा ओपी राजभर ने की। ओपी राजभर भी ग़ाज़ीपुर की जहूराबाद सीट से विधायक हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी भी ब्रजेश सिंह को मैदान में तो लाना चाहती है लेकिन उन्हें अपना सिंबल नहीं देना चाहती।
ओपी राजभर के जरिए ब्रजेश सिंह को मैदान में उतारकर बीजेपी एक तीर से दो निशाने साध सकती है। सुभासपा के टिकट पर ब्रजेश सिंह को मैदान में उतारने से राजभर का मकसद पूरा हो जाएगा और अफजाल अंसारी को कड़ी टक्कर देने वाला उम्मीदवार मिल जाएगा। पिछली बार मोदी लहर में भी बीजेपी ये सीट हार गई थी। उस समय अफजाल अंसारी ने तत्कालीन रेल मंत्री मनोज सिन्हा को हराया था। उस वक्त बसपा ने अफजाल को टिकट दिया था और गठबंधन के चलते सपा का भी समर्थन मिला था। अफजल को दोबारा सांसद बनने से रोकने के लिए बीजेपी यहां कोई भी दांव खेल सकती है। इसमें सबसे आसान दांव ब्रजेश सिंह का हो सकता है।
माफिया डॉन मुख्तार अंसारी और माफिया डॉन ब्रजेश सिंह के बीच दुश्मनी किसी से छुपी नहीं है। दोनों गिरोह तीन दशकों से एक-दूसरे को खत्म करने की कोशिश के लिए कुख्यात हैं। ग़ाज़ीपुर में दोनों के बीच आमना-सामना हो चुका है और खूनी संघर्ष के बाद ब्रजेश सिंह सालों से लापता हैं। दोनों की दुश्मनी का नतीजा ये हुआ कि ग़ाज़ीपुर में कृष्णानंद राय हत्याकांड हुआ। इसमें विधायक कृष्णानंद राय समेत सात अन्य लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इससे पहले ब्रजेश सिंह वाराणसी से विधायक थे। तब भी बीजेपी ने अपना सिंबल नहीं दिया था लेकिन उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था। ऐसे में सपा से सीधे मुकाबले में ब्रजेश सिंह को आसान जीत मिली।
इस समय ब्रजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह वाराणसी से विधायक हैं। ग़ाज़ीपुर और पड़ोसी मऊ जिले की राजनीति पर अफ़ज़ल-मुख्तार परिवार का गहरा प्रभाव तमाम विरोधों और बाधाओं के बाद भी कायम है। आज भी अफ़ज़ल के भाई ग़ाज़ीपुर से सांसद हैं जबकि उनका बेटा मऊ सीट से विधायक है। बड़े भाई का बेटा भी उसी ग़ाज़ीपुर सीट से विधायक है। इससे पहले अफजाल अंसारी के पिता सुभानल्लाह अंसारी 1977 से लेकर करीब 10 साल तक मोहम्मदाबाद टाउन एरिया के चेयरमैन रहे थे। अफजाल अंसारी मोहम्मदाबाद सीट से पांच बार विधायक रहे। पार्टी कोई भी रही हो जीत अफ़ज़ल की ही हुई। वह पहली बार बसपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे।
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अफजाल अंसारी पहली बार 2004 में सपा के टिकट पर लोकसभा पहुंचे थे। इसके कुछ ही दिन बाद 29 नवंबर 2005 को मोहम्मदाबाद से विधायक कृष्णानंद राय समेत सात अन्य की हत्या कर दी गई थी। अगले चुनाव में सपा से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने 2009 में बसपा से चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। अगली बार उन्होंने कौमी एकता दल बनाकर बलिया से चुनाव लड़ा लेकिन वहां भी हार गए। पिछली बार वह सपा-बसपा गठबंधन से मनोज सिन्हा जैसे कद्दावर नेता को हराकर दोबारा सांसद बने थे। गैंगस्टर मामले में सजा मिलने के बाद उनकी सदस्यता रद्द कर दी गयी थी। कुछ समय बाद कोर्ट ने सदस्यता बहाल कर दी।


