Meerut : चाहे कोई कितना भी बड़ा करोड़पति क्यों न बन जाए लेकिन कानून के आगे हर किसी को झुकना पड़ता है। यह बात एक बार फिर सच साबित हो गई है क्योंकि उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) में एक अमीर व्यापारी और कई कंपनियों के मालिक कमर अहमद को एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने गिरफ्तार कर लिया है। उन पर फर्जी ई-बिल के जरिए करीब 100 करोड़ की जीएसटी धोखाधड़ी करने का आरोप है।
Meerut में फर्श पर बीती रईसजादे की रात
आलीशान हवेली के साथ विलासितापूर्ण जीवन शैली और सर्दियों में हीटर का उपयोग करने के आदी इस धनी व्यापारी ने पूरी रात पुलिस स्टेशन के फर्श पर बिताई। इस दौरान उनके पास ठंड से बचने के लिए सिर्फ एक कंबल था। कानून के शिकंजे में फंसते ही व्यवसायी का वैभवशाली जीवन कुछ ही क्षणों में समाप्त हो गया। अब एसटीएफ ने आरोपी कमर अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
कई कंपनियों का मालिक है कमर अहमद
कई कंपनियों के मालिक करोड़पति कारोबारी कमर अहमद पर फर्जी ई-बिल के जरिए करोड़ों की जीएसटी चोरी में शामिल होने का खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि अब एसटीएफ ने आरोपी कमर अहमद के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। गौरतलब है कि कई दिनों से एसटीएफ को मेरठ (Meerut) में बड़ी जीएसटी चोरी का इनपुट मिल रहा था। जीएसटी चोरी के इनपुट पर एसटीएफ की टीम लगातार जांच कर रही थी।
करोड़ों-अरबों की है अहमद की संपत्ति
जांच के दौरान आरोपी के रूप में कमर अहमद का नाम सामने आया। जांच में पता चला कि कमर अहमद कई कंपनियों का मालिक है और कई बड़े बिजनेस में पार्टनर है। वह करोड़ों-अरबों की संपत्ति का मालिक है। जांच में आगे खुलासा हुआ कि कमर अहमद फर्जी ई-बिल के जरिए लाखों की जीएसटी चोरी में शामिल था। बताया जा रहा है कि आरोपी कमर अहमद के पास से एसटीएफ ने कई दस्तावेज और मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
Meerut में होटल से एसटीएफ ने कमर को किया गिरफ्तार
मिली जानकारी के मुताबिक एसटीएफ को सूचना मिली थी कि आरोपी कमर अहमद मेरठ के ब्रॉडवे इन होटल में मौजूद है। एसटीएफ की टीम तुरंत होटल पहुंची। एसटीएफ की टीम ने आरोपी कमर अहमद को हिरासत में लिया और उससे पूछताछ शुरू कर दी। इसी दौरान एसटीएफ ने कमर अहमद को गिरफ्तार कर लिया। जानकारी के मुताबिक अब एसटीएफ कमर अहमद के साथियों पर फोकस कर रही है।
कमर ने कई फर्जी कंपनियां बनाईं
एसटीएफ को उम्मीद है कि इस मामले की गहन जांच से कई और अहम खुलासे हो सकते हैं। एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि कमर और उसके सहयोगियों ने कुछ पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी नंबर प्राप्त किए और फर्जी कंपनियां पंजीकृत कीं। फिलहाल एसटीएफ मामले की विस्तृत जांच कर रही है।


