ED : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गाज गिरी है। ईडी ने डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट की परियोजना निदेशक लुईस खुर्शीद को नोटिस जारी कर 15 फरवरी को लखनऊ स्थित क्षेत्रीय मुख्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया है।
यह जांच फर्रुखाबाद में डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा दिव्यांग व्यक्तियों को सहायता वितरण में कथित अनियमितताओं के इर्द-गिर्द घूमती है। जानकारी के मुताबिक, दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंग और उपकरण वितरण को लेकर 2017 में फर्रुखाबाद में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले की जांच शुरुआत में सीबीआई ने भी की थी।
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दिव्यांग व्यक्तियों को सहायता वितरण में फर्जी दावे
ED : 2009-10 में, डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट ने 17 जिलों में शिविर आयोजित किए, जिसमें दिव्यांग व्यक्तियों को कृत्रिम अंग वितरित किए गए। केंद्र सरकार ने इस पहल के लिए लगभग ₹71 लाख की सब्सिडी प्रदान की। आरोप लगे कि इस दौरान फर्जी हस्ताक्षर और स्टांप का इस्तेमाल किया गया, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। इसके बाद उत्तर प्रदेश के बरेली, बुलंदशहर और शाहजहांपुर सहित कई जिलों में मामले दर्ज किए गए।
लुईस खुर्शीद और मोहम्मद अतहर फारूकी नामित
इस मामले में लुईस खुर्शीद और संस्था के सचिव मोहम्मद अतहर फारूकी को नामजद किया गया है। आरोपों में सरकारी धन का शोषण करने के लिए झूठी मुहरें और हस्ताक्षर लगाना शामिल है। जांच से पता चला कि सहायता वितरण के लिए कोई शिविर नहीं लगाया गया था, और पुलिस ने दोनों व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। कई बार समन भेजने के बावजूद न तो अदालत में पेश हुए और न ही जमानत ली।
कोर्ट ने जारी किया गैर जमानती वारंट
उनके खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया है। इसके साथ ही ED ने दर्ज शिकायतों के आधार पर ट्रस्ट और उसके अधिकारियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। ईडी ने सक्रिय रुख अपनाते हुए लुईस खुर्शीद को नोटिस जारी कर कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में उनसे जवाब मांगा है।
यह घटनाक्रम वित्तीय विसंगतियों के लिए जांच का सामना कर रहे राजनीतिक हस्तियों और संगठनों के साथ उनके संबंधों को लेकर चल रही बहस में एक और परत जोड़ता है। जांच के नतीजे का राजनीतिक परिदृश्य और इसमें शामिल व्यक्तियों पर प्रभाव पड़ने की संभावना है। ईडी इस मामले के विवरण की जांच जारी रखे हुए है, जिसका लक्ष्य दिव्यांग नागरिकों के लिए निर्धारित धन के कथित दुरुपयोग पर स्पष्टता लाना है।


