Dhananjay Singh : आखिर कौन है धनंजय सिंह..? जौनपुर में जिसके नाम की तूती बोलती है। आपको बता दें कि धनंजय सिंह का ऐसा जलवा है कि 2009 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की। जब ये शख्स सड़क निकलता तो सैकड़ो गाड़ियों का काफिला इनके पीछे चलता। वही धनंजय सिंह को उत्तर प्रदेश की जनता एक बाहुबली नेता के तौर पर देखती हैं। इस बाहुबली नेता को अब जेल जाना पड़ेगा। बता दें कि रंगदारी एवं अपहरण के मामले में दोषी पाए गए। बताया जा रहा है कि धनंजय पर जौनपुर की विशेष अदालत ने जुर्माना भी लगाया और साथ ही सात साल की सजा भी मुकर्रर की है। इस पुरे मामले में इस बीच अभिनव सिंघल का नाम खूब चर्चा में है। ये वो इंसान है जिसके मजबूत इरादों ने धनंजय को जेल का रास्ता दिखाया है। चलिए बता दें कि कौन है अभिनव सिंघल ?
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर शहर के रहने वाले अभिनव सिंघल को एक दृढ़ निश्चयी और मिलनसार व्यक्ति बताया जाता है। उनका बचपन शिक्षाविदों में गहरी रुचि, विशेष रूप से गणित और विज्ञान में उत्कृष्टता से चिह्नित था। इस जुनून से प्रेरित होकर, उन्होंने नमामि गंगे परियोजना से जुड़कर इंजीनियरिंग में अपना करियर बनाया।
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अभिनव सिंघल के जीवन में तब बदलाव आया जब उन्हें नमामि गंगे परियोजना में अनियमितताओं का पता चला, जिसमें वे भी शामिल थे। ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहते हुए, अभिनव ने विभिन्न प्रलोभनों का विरोध किया और धमकियों का सामना किया। विशेष रूप से, धमकी देने वालों में से एक धनंजय सिंह भी थे, जिन्होंने धमकी के बावजूद निडर होकर अपना काम जारी रखा।
ये है मामला
Dhananjay Singh : यह कहानी हमें लगभग चार साल पीछे ले जाती है जब अभिनव सिंघल ने 10 मई 2020 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत ने उत्तर प्रदेश में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी, जिसमें धनंजय सिंह पर गंभीर अपराधों का आरोप लगाया गया। अभिनव के मुताबिक धनंजय विक्रम समेत अपने साथियों के साथ पचहटिया स्थल पर पहुंचे। इसके बाद धनंजय ने कथित तौर पर उसका अपहरण कर लिया, उसे अपने आवास पर ले गया, पिस्तौल दिखाते हुए धमकी दी। इन कार्रवाइयों के पीछे का मकसद अभिनव को घटिया सामग्री की आपूर्ति को मंजूरी देने के लिए मजबूर करने का प्रयास था।
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इस कठिन परीक्षा से बचकर अभिनव भागने में सफल रहा और शिकायत दर्ज कराने के लिए लाइन बाजार पुलिस स्टेशन पहुंचा। उन्होंने पुलिस से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। नतीजतन, धनंजय सिंह को उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया गया और अगले दिन उन्हें अदालत में पेश किया गया, जिससे उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जबकि धनंजय ने अदालत में जमानत मांगी, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। हालाँकि, बाद में उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहां उन्हें जमानत मिल गई। इसके बाद धनंजय ने दावा किया कि उसे साजिश के तहत फंसाया गया है। एमपी-एमएलए अदालत में मुकदमा चल रहा है, जहां धनंजय सिंह और उनके साथी संतोष विक्रम को दोषी घोषित किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप उनकी गिरफ्तारी हुई और बाद में कारावास की सजा हुई।
43 में से 22 मुकदमे में दोषमुक्त
Dhananjay Singh : धनंजय सिंह केआपराधिक इतिहास को तीन दशक से अधिक समय का है। पुलिस डोजियर द्वारा मिली जानकारी के अनुसार साल 1991 से लेकर 2023 के बीच जौनपुर धनंजय सिंह के खिलाफ दिल्ली एवं लखनऊ में 43 आपराधिक मामले दर्ज हुए। धनंजय को अदालत ने जिनमें से 22 मामलों पर दोषमुक्त कर दिया है। शासन ने 3 मुकदमों को वापस लिया हैं। धनंजय की हत्या के मामले में नामजदगी गलत साबित हुई है। वही पुलिस की तरफ से अदालत में धमकाने को लेकर आखिरी रिपोर्ट दाखिल की गई है। धनंजय को इस मामले में दोषी पाया है।


