Lok Sabha Election 2024 : आम आदमी पार्टी (आप) के साथ गठबंधन के बावजूद तीन सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों की घोषणा से पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष फैल गया है। इन सबके बीच शीला दीक्षित सरकार में 15 साल तक मंत्री रहे राजकुमार चौहान ने प्रदेश कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
उत्तर पश्चिमी दिल्ली से टिकट के दावेदार रहे चौहान ने नामांकन नहीं किये जाने पर नाराजगी जताई। इस सीट से पूर्व सांसद उदित राज को टिकट दिया गया, जिससे चौहान नाराज हो गए।
गौरतलब है कि रविवार को प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया ने इस लोकसभा क्षेत्र के प्रमुख नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें चौहान ने खुलकर अपना विरोध जताया था। मुलाकात के दौरान उनके और बाबरिया के बीच तीखी बहस हो गई। घटना से आहत होकर उसने यह कदम उठाया।
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अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली को लिखा पत्र
चौहान ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली को पत्र लिखकर कहा, ”मेरे पिता, दादा और मेरा पूरा परिवार कांग्रेस से जुड़ा रहा है।” उन्होंने एक बैठक का भी जिक्र किया जो शुरू में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में बुलाई गई थी लेकिन बाद में रद्द कर दी गई और प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया के कार्यालय में स्थानांतरित कर दी गई।
इस बैठक में करीब 20-25 वरिष्ठ नेता मौजूद थे। जैसे ही मैंने बोलना शुरू किया, प्रदेश प्रभारी ने मुझे चार-पांच बार बैठक से बाहर जाने को कहा, इसके बावजूद मैंने अपने विचार व्यक्त किये। यह घटना एक बंद कमरे में हुई बैठक के दौरान हुई, यह अनुशासन के विरुद्ध नहीं है। यह हमारी पार्टी का आंतरिक लोकतंत्र है जहां हम अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश प्रभारी के व्यवहार से वह अपमानित महसूस कर रहे हैं। उधर, प्रदेशप्रभारी दीपक बाबरिया ने दावा किया कि राजकुमार चौहान पहले भाजपा में शामिल हुए थे और बाद में कांग्रेस में लौट आए।
प्रत्याशी घोषित होने के बाद भी वह उनके खिलाफ काम करते रहे। इसलिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई। संभव है कि इसी वजह से उन्होंने इस्तीफा दिया हो।
बता दें कि 2019 में भी राजकुमार ने नॉर्थ वेस्ट दिल्ली से टिकट मांगा था, लेकिन तब भी उन्हें टिकट नहीं मिला था. विपक्ष में रहते हुए वह चुनाव से एक दिन पहले बीजेपी में शामिल हुए थे। आठ महीने तक बीजेपी में रहने के बाद 2020 में विधानसभा चुनाव से एक महीने पहले वह कांग्रेस में लौट आए। कांग्रेस में शामिल होने से पहले उन्होंने पार्टी नेता सोनिया गांधी से भी मुलाकात की।


