Badlapur Sexual Abuse Case : गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के बदलापुर में एक स्कूल में छोटी बच्चियों के यौन उत्पीड़न से जुड़ी एक दर्दनाक घटना का स्वतः संज्ञान लिया। न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की पीठ ने मामले से संबंधित एक एफआईआर की समीक्षा करने के बाद कार्यवाही शुरू की। अदालत ने पाया कि उसने घटना के बारे में समाचार रिपोर्टों के आधार पर कार्रवाई की थी।
सुनवाई के दौरान, विशेष आईजी आरती सिंह और डीसीपी सुधाकर पठारे, जो मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) की देखरेख कर रहे हैं, अदालत में मौजूद थे। राज्य का प्रतिनिधित्व महाधिवक्ता बीरेंद्र सर्राफ और विशेष पीपी हितेन वेनेगांवकर ने किया।
जांच की जानकारी
महाधिवक्ता बीरेंद्र सर्राफ ने अदालत को सूचित किया कि एसआईटी ने बुधवार को अपनी जांच शुरू कर दी थी और पहले ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। अदालत ने पूछा कि क्या सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज किए गए हैं। सर्राफ ने जवाब दिया कि आरोपी को गुरुवार को गिरफ्तार किया जाएगा, और केस डायरी और एफआईआर की कॉपी अदालत को मुहैया कराई गई है।
POCSO अधिनियम और बयान
अदालत ने पूछा कि क्या मामला यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज किया गया था। सर्राफ ने पुष्टि की कि मामला दर्ज होने के समय महिला अधिकारी मौजूद थीं और पीड़ितों की मेडिकल जांच पूरी हो चुकी थी। हालांकि, उन्होंने उल्लेख किया कि धारा 164 के तहत बयान अभी तक दर्ज नहीं किए गए हैं और SIT द्वारा पूरी समीक्षा के बाद उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा।
स्कूल की भूमिका और कार्रवाई
अदालत ने पूछा कि क्या शिकायतों पर कार्रवाई करने में विफल रहने के लिए स्कूल के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। सर्राफ ने जवाब दिया कि एफआईआर से ऐसा प्रतीत होता है कि कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि स्कूल के अधिकारियों को POCSO प्रावधानों के अनुसार मामले में पक्ष बनाया जाना चाहिए। सर्राफ ने स्वीकार किया कि अब जब SIT का गठन हो गया है तो इस पर ध्यान दिया जाएगा।
न्यायालय ने पीड़ितों को परामर्श प्रदान न किए जाने पर चिंता व्यक्त की और पूछा कि बदलापुर पुलिस द्वारा एसआईटी को पूरा अभिलेख क्यों नहीं सौंपा गया। सर्राफ ने संकेत दिया कि दूसरे पीड़ित के बयान अभी तक दर्ज नहीं किए गए हैं।
कानूनी सहायता और भविष्य की कार्यवाही
न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि पीड़ितों और उनके परिवारों को सभी आवश्यक कानूनी सहायता और परामर्श मिलना चाहिए। इसने मांग की कि पीड़ितों और उनके परिवारों दोनों के लिए धारा 164 के तहत बयान दर्ज किए जाएं। न्यायालय ने बदलापुर पुलिस द्वारा की गई जांच पर विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी।
न्यायालय ने अगली सुनवाई मंगलवार को दोपहर 2:30 बजे निर्धारित की, जिसमें सर्राफ से बदलापुर पुलिस की जांच के बारे में व्यापक उत्तर देने का आग्रह किया गया। पीठ ने कहा कि यदि स्कूल सुरक्षित नहीं हैं, तो शिक्षा और अन्य अधिकारों के बारे में चर्चा निरर्थक हो जाती है।
ये भी पढ़ें : Ayodhya News : आखिर मुस्लिम महिला के शौहर ने क्यों जलाया उसका चेहरा, जानिए पूरा मामला


