Krishna Janmashtami 2024 : रोहिणी नक्षत्र में अष्टमी की शुभ रात्रि और सोमवार व जयंती योग के अनूठे संयोग में भगवान कृष्ण, जिन्हें लड्डू गोपाल के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म होगा। काशी विश्वनाथ धाम और अन्य मंदिरों सहित पूरा शहर कृष्ण के जन्मोत्सव से जगमगा उठेगा और हर घर में भक्तगण खुशियां मनाएंगे।
रविवार को सुबह से ही भव्य उत्सव की तैयारियां शुरू हो गईं, बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई। लोग अपने प्रिय कान्हा को सजाने के लिए नए कपड़े खरीदने में व्यस्त थे, जबकि अन्य लोगों ने उपहार के रूप में खिलौने खरीदे। घरों में सजाई जाने वाली सजावटी झांकियों की तैयारियां देर रात तक जारी रहीं।

श्री काशी विश्वनाथ धाम में पहली बार मध्य रात्रि में भगवान कृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में मंदिर प्रांगण को सजाया जा रहा है। इसी तरह दुर्गा कुंड स्थित मणि मंदिर में भी तैयारियां जोरों पर हैं। शिव की नगरी में कृष्ण जन्माष्टमी का उल्लासपूर्ण उत्सव मनाया जाएगा, जिसमें लड्डू गोपाल का भव्य अभिषेक किया जाएगा।
भव्य आयोजन
रविवार को अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण चेतना समिति (इस्कॉन) ने कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव की शुरुआत की। दुर्गा कुंड स्थित इस्कॉन मंदिर में तीन दिवसीय महा महोत्सव की शुरुआत हुई। कृष्ण लीला पर प्रवचन के दौरान प्रबंधन समिति के अध्यक्ष अच्युत मोहन दास ने बताया कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा, दुष्टों का नाश और विश्व के कल्याण के लिए अवतार लेते हैं।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पूर्व आईआईटी छात्रों ने भक्ति संगीत और मनमोहक लाइव नृत्य नाटिकाओं के साथ “आनंद की शाम” नामक कार्यक्रम का आयोजन किया। मंदिर की राधा-कृष्ण की मूर्तियों को फूलों से सजाया गया और भव्य भोज का आयोजन किया गया।

गोपाल मंदिर में तीन दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव की शुरुआत
चौक स्थित गोपाल मंदिर में रविवार को तीन दिवसीय कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की शुरुआत हुई। पहले दिन षष्ठपीठाधीश्वर गोस्वामी श्याम मनोहर महाराज ने लड्डू गोपाल का विधिवत श्रृंगार व पूजन किया। भगवान के उत्थापन दर्शन के साथ ही शाम तक मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रही। सोमवार को मंदिर में जन्माष्टमी मनाई जाएगी, जबकि बेटीजी मंदिर में श्याम प्रभु के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं।
कान्हा और राधा के लिए फैंसी ड्रेस की मांग अधिक
जन्माष्टमी के लिए विभिन्न सजावटी सामान और परिधानों की तलाश में रविवार को बाजारों में खरीदारों की भीड़ रही। सबसे अधिक मांग कान्हा के परिधानों की रही। चौक, दशाश्वमेध, गोदौलिया, लंका, सिगरा, रथयात्रा, अर्दली बाजार और पांडेयपुर जैसे इलाकों में कान्हा और राधा के लिए फैंसी ड्रेस की बिक्री में उछाल देखा गया।
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया के चलन ने लोगों की खास शैलियों के प्रति पसंद को प्रभावित किया है। लोग अक्सर अपने बच्चों को कान्हा की तरह कपड़े पहनाते हैं, चाहे वह स्कूल के कार्यक्रम हों या निजी समारोह। इसके अलावा, मंदिरों में देवताओं के लिए नए, अलंकृत कपड़े भी खूब पसंद किए गए।

चौक के नारियल बाजार के एक व्यापारी नंदलाल अरोड़ा ने बताया कि शिशु कान्हा के लिए कपड़ों की बहुत मांग है, खासकर 2 से 5 तक के आकार के। बुटीक ड्रेस की कीमत ₹150 से ₹500 तक है, जबकि फैंसी पगड़ी की कीमत ₹25 से ₹200 के बीच है। राधा-कृष्ण की पोशाक की कीमत ₹225 से ₹550 तक, बांसुरी की कीमत ₹10 से ₹50 तक, मुकुट की कीमत ₹50 से ₹400 तक, हार की कीमत ₹15 से ₹200 तक और सिंहासन की कीमत ₹150 से ₹400 तक है।


