Jaunpur News : उत्तर प्रदेश से एक बड़ी खबर सामने आई है। आपको बता दें कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव शाहनवाज आलम ने जौनपुर की अटाला मस्जिद को मंदिर बताने वाली याचिका की पोषणीयता को जौनपुर की अदालत द्वारा स्वीकार किए जाने को पूजा स्थल अधिनियम की अवमानना करार दिया है। शाहनवाज आलम ने इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश से कार्रवाई की मांग की है, और कहा कि इस मामले में अदालत का रुख असंवैधानिक है।
शाहनवाज आलम ने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम स्पष्ट रूप से कहता है कि 15 अगस्त 1947 तक जो पूजा स्थलों का चरित्र था, उसमें कोई बदलाव नहीं हो सकता और इस पर किसी भी तरह की याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर निचली अदालतें इस अधिनियम की अवमानना करती हैं और सुप्रीम कोर्ट चुप रहता है, तो इससे उनकी नीयत पर सवाल उठते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी पर उठे सवाल
शाहनवाज आलम ने आगे कहा कि इस तरह की याचिकाओं की बाढ़ आना, निचली अदालतों द्वारा उन्हें स्वीकार करना और सुप्रीम कोर्ट का मूकदर्शक बने रहना यह साबित करता है कि देश का माहौल बिगाड़ने की साजिश में न्यायपालिका का भी एक हिस्सा शामिल है। यह एक ऐसा उदाहरण बन गया है, जहां न्यायालय के सहयोग से किसी देश को सांप्रदायिकता की आग में झोंकने की कोशिश की जा रही है, और यह पूरी दुनिया में एक अनोखा मामला बन गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि 6 दिसंबर से उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कांग्रेस पूजा स्थल अधिनियम की अवमानना पर सुप्रीम कोर्ट की संदेहास्पद चुप्पी के खिलाफ एक लाख पत्र भेजकर अभियान चला रही है। इस अभियान का उद्देश्य यह जानना है कि सुप्रीम कोर्ट चुप क्यों है और इस मुद्दे पर उसकी चुप्पी की वजह क्या है।
राजनीतिक दलों से अपील
शाहनवाज आलम ने यह भी कहा कि संविधान और क़ानून के शासन में विश्वास रखने वाले राजनीतिक दलों को खुलकर पूजा स्थल अधिनियम की रक्षा के लिए सामने आना चाहिए। (Jaunpur News) उनका मानना है कि अगर इस अधिनियम की रक्षा नहीं की जाती है, तो इससे पूरे देश में सांप्रदायिक माहौल बिगड़ सकता है।
क्या है मामला?
इस मामले की जड़ जौनपुर की अटाला मस्जिद में है, जहां एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें मस्जिद को मंदिर बताया गया। इस याचिका को जौनपुर की अदालत ने स्वीकार किया था और अब अदालत ने मस्जिद का सर्वे कराने के आदेश दिए हैं। 16 दिसंबर को इस सर्वे की टीम का प्रारूप तय किया जाएगा और यह निर्णय लिया जाएगा कि मस्जिद में सर्वे कैसे पूरा किया जाएगा।
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