UP Assembly Winter Session 2024 : उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से शुरू होने जा रहा है। इस सत्र में हाल ही में संभल और बहराइच में हुई हिंसा के मुद्दे को लेकर सदन में हंगामे के आसार हैं। इसके अलावा विपक्ष बेरोजगारी, बिजली के निजीकरण, किसानों के मुद्दों और अन्य ज्वलंत विषयों को उठाने की तैयारी में है। इस सत्र में सरकार 17 दिसंबर को कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ-साथ अनुपूरक बजट भी पेश कर सकती है। अनुमान है कि अनुपूरक बजट 12 से 15 हजार करोड़ के बीच होगा।
सत्र के पहले दिन होंगे औपचारिक कार्य
सत्र के पहले दिन सदन में औपचारिक कार्य किए जाएंगे। इस छोटे सत्र में कुल चार दिन की कार्यवाही होनी है। सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पास कराने की कोशिश करेगी। साथ ही, अनुपूरक बजट को लेकर भी चर्चा हो सकती है।
सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने उठाया सत्र की अवधि बढ़ाने का मुद्दा
सत्र से पहले रविवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक और व्यापार सलाहकार समिति की बैठकों में विपक्ष ने मांग की कि सत्र की अवधि बढ़ाई जाए, ताकि चर्चा के लिए अधिक समय मिल सके। विपक्ष ने यह भी कहा कि सरकार को अनुदानों की अनुपूरक मांगों को भी लाना चाहिए। समाजवादी पार्टी (सपा) की तरफ से मंगलवार को विधानमंडल दल की बैठक होगी, जिसमें पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मौजूद रहेंगे। यह पहला मौका होगा जब सपा विधानमंडल दल की बैठक सत्र शुरू होने के बाद आयोजित की जाएगी।
‘सत्र सरकार की सुविधा के हिसाब से चलता है’ – सपा का आरोप
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता और सपा के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडेय ने कहा, “जब सरकार जनता की बात नहीं सुनती है तो विपक्ष को अपनी बात जोरदार तरीके से कहनी पड़ती है। सत्र को ज्यादा से ज्यादा दिन चलाना चाहिए, लेकिन सरकार इसे अपनी सुविधा के अनुसार चलाती है। नियम है कि सत्र साल में कम से कम 90 दिनों तक चलना चाहिए, लेकिन ऐसा होतो नहीं है।”
उन्होंने कहा कि सपा और विपक्ष की ओर से जनहित के मुद्दे उठाए जाएंगे। सबसे अहम मुद्दा यह है कि संभल और बहराइच जैसी सांप्रदायिक घटनाओं पर सरकार का ध्यान खींचा जाएगा। इसके अलावा किसानों, बिजली, महंगाई और अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।
कांग्रेस करेगी विधानसभा का घेराव
सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ने भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “करीब 25 करोड़ की आबादी वाले राज्य में अगर विधानसभा सत्र महज चार दिन का हो तो यह सरकार की जनता के मुद्दों को लेकर गंभीरता को दर्शाता है। सत्र का मतलब क्या है अगर यह हमारे निर्वाचन क्षेत्र और राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों जैसे कानून व्यवस्था, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे, शिक्षा, स्वास्थ्य पर चर्चा के लिए नहीं है?”
आराधना मिश्रा ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने सत्र की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है और 18 दिसंबर को यूपी कांग्रेस विधानसभा का घेराव करेगी। इस बार विधानसभा सत्र 20 दिसंबर तक चलेगा।
सत्र पर विपक्ष का दबाव
सत्र की शुरुआत से पहले विपक्ष ने सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की है। विपक्ष की ओर से सत्र की अवधि बढ़ाने, जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने और सपा, कांग्रेस जैसी पार्टियों द्वारा आंदोलन की चेतावनी दी गई है। अब यह देखना होगा कि सरकार इन मुद्दों पर कितनी संवेदनशीलता दिखाती है और सदन में किस हद तक विपक्ष की आवाज को सुना जाता है।
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