Maha Kumbh 2025 : महाकुंभ में मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा लगाए जाने को लेकर विवाद पैदा हो गया है। साधु संतों ने इसे हिंदू विरोधी करार देते हुए इसका विरोध किया है। साधु संतों का कहना है कि इस प्रकार की प्रतिमा की स्थापना कुंभ के पवित्र आयोजन से मेल नहीं खाती और यह हिंदू धर्म के सिद्धांतों के खिलाफ है।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फकरुल हसन चंद ने इस विरोध पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह विरोध साधु संतों द्वारा नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी द्वारा मुलायम सिंह स्मृति सेवा संस्थान के जरिए श्रद्धालुओं के लिए जो सेवाएं दी जा रही हैं, जैसे कि खाने-पीने की व्यवस्था, रहने की व्यवस्था और कंबल वितरण वो पूरी निस्वार्थ भाव से की जा रही हैं। इसके बावजूद बीजेपी इसका विरोध कर रही है।
फकरुल हसन ने कहा कि बीजेपी ने कभी भी इस तरह के सेवा कार्यों में भाग नहीं लिया और जब कोई संस्थान नेताजी के नाम से कार्य कर रहा है तो बीजेपी को इसमें दिक्कत हो रही है। उनका कहना था कि बीजेपी राजनीति कर रही है और इसका उद्देश्य केवल समाजवादी पार्टी को निशाना बनाना है।
बीजेपी पर सवाल
कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और उनकी मूर्ति लगाना एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा कि नेताओं की मूर्तियां लगनी चाहिए, जैसे कि कांग्रेस के नेताओं गोविंद बल्लभजी पंत और जवाहरलाल नेहरू की मूर्तियां लगनी चाहिए।
अंशु अवस्थी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी एक ओर तो आरोप लगाती है कि उसने कारसेवकों पर गोली चलवाई थी और दूसरी ओर पद्म भूषण जैसे पुरस्कार देती है। उन्होंने कहा कि सभी नेताओं की मूर्तियां लगनी चाहिए, लेकिन बीजेपी को इस मामले में अपना स्टैंड स्पष्ट करना चाहिए। इससे उनकी दोहरी नीति उजागर होती है।
प्रतिमा का अनावरण
गौरतलब है कि कुंभ में विभिन्न संस्थानों को स्थान आवंटित किया गया है, और मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा का अनावरण शनिवार को किया गया था। मुलायम सिंह न्यास सेवा समिति को भी एक स्थान आवंटित हुआ था, जहां उनकी तीन फुट ऊंची प्रतिमा लगाई गई है।


