Akhilesh Yadav : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट किया, जो सुर्खियों में आ गया। इस पोस्ट में किसी पार्टी या नेता का नाम नहीं था और न ही किसी आरोप-प्रत्यारोप का जिक्र था, जो कि अक्सर उनकी पोस्टों में देखने को मिलता है। अखिलेश यादव ने बस एक प्रसिद्ध उक्ति साझा की, “जैसी संगत वैसी वाणी कह गये सब संत-ज्ञानी।”
इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गईं और माना जा रहा है कि अखिलेश यादव ने यह पोस्ट अयोध्या स्थित हनुमान गढ़ी के महंत राजूदास द्वारा की गई विवादित टिप्पणी के जवाब में किया है।
दरअसल, सोमवार को महंत राजूदास ने सोशल मीडिया पर मुलायम सिंह यादव की एक तस्वीर के साथ विवादित टिप्पणी की थी। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी पोस्ट हटा दी थी, लेकिन तब तक वह वायरल हो चुकी थी। अब अखिलेश यादव के पोस्ट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके बयान को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दीं।
यूजर मणींद्र मिश्रा ने कही ये बात
यूजर मणींद्र मिश्रा ने टिप्पणी करते हुए लिखा “राजू दास का इलाज आवश्यक है। डर के बिना कोई प्रेम नहीं होता! विनय नहीं मानने पर समुद्र भी तीन दिन तक स्थिर हो गया। तब भगवान राम ने क्रोध में कहा कि बिना भय के प्रेम संभव नहीं होता।”
मनोज राय ने महंत राजूदास के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा “संघी विचारधारा और सामंती सोच रखने वाले लोग अपनी वाणी से अपने स्तर और मानसिकता का परिचय देते हैं।”
उन्होंने आगे कहा “धरतीपुत्र मुलायम सिंह यादव का अपमान करके ये लोग अपनी अंदर की कुंठा को उजागर कर रहे हैं, लेकिन समाजवादी विचारधारा की ताकत ने उन्हें मजबूर कर दिया है कि वे अपनी बात वापस लें।”
अंत में मनोज राय ने कहा, “जैसी संगत, वैसी वाणी।”
अभिषेक घरवार ने भी अखिलेश यादव के बयान का समर्थन करते हुए कहा “अखिलेश भैया से बिल्कुल सहमत हूं, जैसी संगत वैसी वाणी।”
इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गईं और यह स्पष्ट हो गया कि अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने अपनी इस उक्ति के माध्यम से महंत राजूदास की विवादित टिप्पणी का परोक्ष रूप से विरोध किया है। साथ ही, समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के समर्थकों ने इसे एक सशक्त संदेश के रूप में लिया है, जो किसी भी प्रकार की अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ खड़ा है।


