Maha Kumbh 2025 : आज पूरा देश 76वें गणतंत्र दिवस की रंगीन और जोशपूर्ण धूम में डूबा हुआ है। वहीं, त्रिवेणी के तट पर हो रहे आस्था और अध्यात्म के महा समागम प्रयागराज महाकुंभ में भी राष्ट्रभक्ति और धार्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। महाकुंभ क्षेत्र के साधु-संतों और विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के शिविरों में जगह-जगह राष्ट्र ध्वज फहराया गया, राष्ट्रगान गाया गया और देश की एकता, अखंडता के लिए सामूहिक शपथ ली गई।
महाकुंभ में धर्म और अध्यात्म में लीन रहने वाले साधु-संतों ने गणतंत्र दिवस को पूरे उत्साह और जोश के साथ मनाया। महाकुंभ क्षेत्र में हर तरफ भगवा रंग के झंडों के साथ-साथ तिरंगे के रंगों का अद्भुत दृश्य था। सबसे पहले महाकुंभ के दंडी स्वामी संतो के दंडी स्वामी नगर में अखिल भारतीय दंडी स्वामी परिषद के अध्यक्ष स्वामी महेशाश्रम के शिविर में हजारों संतों ने एक साथ राष्ट्रीय ध्वज का ध्वजारोहण किया और राष्ट्रगान गाया।
साधु-संतों ने ली शपथ
गणतंत्र दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय दंडी स्वामी परिषद के अध्यक्ष श्रीमद जगद्गुरु स्वामी महेशाश्रम ने सभी दंडी स्वामियों को देश की एकता और अखंडता के लिए शपथ दिलाई। स्वामी महेशाश्रम ने यह भी कहा कि देश के हर गांव में एक-एक दंडी स्वामी को भेजा जाएगा, ताकि जाति के नाम पर हिंदू समाज को कमजोर करने की कोशिशों को रोका जा सके। उनका मानना था कि राष्ट्र तभी मजबूत हो सकता है जब हिंदू सनातन धर्म मजबूत हो, और सनातन धर्म की सभी जातियां एक हों।
महंत रविंद्र पुरी ने फहराया तिरंगा
प्रयागराज महाकुंभ के गंगा और यमुना के घाटों पर जहां सुबह से ही हर-हर गंगे और हर-हर महादेव के मंत्रों का उच्चारण हो रहा था, वहीं गणतंत्र दिवस की सुबह इन घाटों और शिविरों में ‘जन गण मन’ की ध्वनियों से माहौल गूंज उठा। महाकुंभ के आकर्षण सेक्टर 20 में भी गणतंत्र दिवस पर भगवा और तिरंगे का अद्भुत मेल देखने को मिला। पंच दशनाम श्री निरंजनी अखाड़े के शिविर में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी की अगुवाई में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया।
महाकुंभ में देशभक्ति के गीतों का माहौल
गणतंत्र दिवस के मौके पर महाकुंभ (Maha Kumbh 2025) में सभी साधु-संतों ने श्रद्धालुओं के साथ मिलकर ‘जन गण मन’ गाया। श्री पंच दशनाम संन्यासिनी अखाड़े में भी महिला नागा संन्यासिनियों ने तिरंगा फहराकर गणतंत्र दिवस मनाया। महाकुंभ के विशाल 4000 एकड़ क्षेत्र में जहां पहले केवल सनातन धर्म के भगवा ध्वज नजर आते थे, वहीं अब तिरंगे के रंग भी हर जगह नजर आ रहे थे। शिविरों में धार्मिक मंत्रोच्चारण और गीतों की जगह देशभक्ति के गीत गूंज रहे थे।


