Delhi-NCR : दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के कारण आम लोगों का जीना मुहाल हो गया है और इस पर नियंत्रण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी कार्रवाई की है। कोर्ट ने हाल ही में एक नया आदेश जारी किया है, जिसके तहत अब दिल्ली और एनसीआर में सभी वाहनों पर होलोग्राम स्टीकर लगाना अनिवार्य होगा। यह स्टीकर न केवल वाहन की पहचान करेगा, बल्कि इससे प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।
क्या होगा इस आदेश में?
सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के तहत अब सभी वाहनों के पास उनका पीयूसी (PUC) सर्टिफिकेट होना चाहिए, साथ ही सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स की भी जांच की जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब वाहनों पर कलर कोडेड स्टीकर लगाना आवश्यक होगा, जो वाहन के ईंधन टाइप को दर्शाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त 2018 को दिए गए अपने आदेश में संशोधन करते हुए यह तय किया है कि यह नियम अब 1 अप्रैल 2019 से पहले बेचे गए और दिल्ली-एनसीआर में रजिस्टर्ड सभी वाहनों पर लागू होगा।
कैसा होगा कलर कोड?
यह कलर कोड वाहन के ईंधन प्रकार के आधार पर निर्धारित किए गए हैं। पेट्रोल और सीएनजी वाहनों के लिए नीला रंग, डीजल वाहनों के लिए नारंगी रंग और बाकी सभी वाहनों के लिए ग्रे रंग का स्टिकर लगाया जाएगा।
इस कलर कोडिंग से यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियां और 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियां आसानी से पहचानी जा सकें, जिससे प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों की पहचान करना सरल हो जाएगा।
क्या होगा नियमों का उल्लंघन करने पर?
जो वाहन मालिक इस आदेश का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की धारा-192 के तहत कार्रवाई की जाएगी। 1 अप्रैल 2019 के बाद बेचे गए और इस आदेश का पालन न करने वाले वाहनों पर जुर्माना लगाया जाएगा। पहली बार उल्लंघन करने पर 2000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं अगर कोई व्यक्ति दोबारा यह गलती करता है तो उसे 5000 से 10,000 रुपये तक का जुर्माना या एक साल की सजा हो सकती है।
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