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Jayant Chaudhary : मेरठ पुलिस के सड़क पर नमाज वाले फैसले पर क्यों भड़के जयंत चौधरी, जॉर्ज ऑरवेल के ‘1984’ का किया जिक्र

by | Mar 27, 2025 | बड़ी खबर, मुख्य खबरें, राजनीति

Jayant Chaudhary : राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिंह चौधरी ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने नमाज पढ़ते मुसलमानों की तस्वीरों के साथ जॉर्ज ऑरवेल के प्रसिद्ध उपन्यास ‘1984’ का जिक्र किया। उनके पोस्ट का संदर्भ मेरठ पुलिस के उस फैसले से जुड़ा था, जिसमें सड़क पर नमाज पढ़ने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और उनके पासपोर्ट निरस्त करने की बात कही गई थी। 

जयंत चौधरी ने अपनी पोस्ट में लिखा, “Policing towards Orwellian 1984!” यानी, ‘पुलिसिंग ऑरवेल के 1984 की ओर’। लेकिन आखिर ‘1984’ उपन्यास में ऐसा क्या है, जिसकी वजह से इसे मौजूदा हालात से जोड़ा जा रहा है? आइए, इस उपन्यास और इसकी प्रासंगिकता को समझते हैं। 

‘1984’ एक काल्पनिक लेकिन बेहद भयावह भविष्य की कहानी है, जिसमें एक सर्वसत्तावादी शासन को दिखाया गया है। यह उपन्यास ओशिनिया नाम के देश और उसके तानाशाह ‘बिग ब्रदर’ पर केंद्रित है, जो अपने शासन को बनाए रखने के लिए जनता पर कठोर नियंत्रण रखता है। 

ऑरवेल ने इस उपन्यास के माध्यम से चेतावनी दी थी कि अगर किसी भी देश में सरकार को असीमित शक्ति मिल जाए, तो वह लोगों की स्वतंत्रता को खत्म कर सकती है और सच को अपने फायदे के लिए तोड़-मरोड़ कर पेश कर सकती है। 

1. निगरानी और प्रचार तंत्र 

  • ‘1984’ में दिखाया गया है कि ओशिनिया में हर नागरिक पर सख्त नजर रखी जाती है। 
  • हर जगह बड़े-बड़े पोस्टर लगे हैं जिन पर लिखा है – “बिग ब्रदर तुमको देख रहा है” लेकिन बिग ब्रदर को कभी किसी ने देखा नहीं। 
  • ‘थॉट पुलिस’ नामक एक गुप्त संगठन लोगों की सोच तक को नियंत्रित करता है। अगर किसी ने सत्ता के खिलाफ कुछ सोचा भी, तो उसे गिरफ्तार कर दिया जाता है। 

2. मीडिया और सच को बदलने की ताकत 

  • सरकार ने जनता को नियंत्रित करने के लिए एक मजबूत ‘प्रचार तंत्र’ बना रखा है। 
  • न्यूज चैनलों और अखबारों के जरिए सच को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता है, ताकि सरकार के खिलाफ कोई आवाज न उठे। 
  • इतिहास को भी बार-बार बदला जाता है, ताकि लोगों को असली सच कभी पता ही न चले। 

 3. डर और दुश्मनी का माहौल 

  • सत्ता बनाए रखने के लिए सरकार हमेशा जनता के सामने एक दुश्मन खड़ा करती है। 
  • जनता को लगातार बताया जाता है कि देश खतरे में है और दुश्मनों से बचने के लिए सरकार का समर्थन करना जरूरी है। 
  • युद्ध को शांति, गुलामी को स्वतंत्रता और अज्ञानता को शक्ति बताया जाता है। 

इस उपन्यास का मुख्य किरदार विंस्टन स्मिथ एक सरकारी कर्मचारी है, जिसका काम अतीत के रिकॉर्ड को सरकार की नीतियों के अनुसार बदलना है। लेकिन वह सरकार का सबसे बड़ा विरोधी बन जाता है और इसे खत्म करना चाहता है। 

  • विंस्टन को सरकार विरोधी विचार रखने के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है। 
  • उसे ‘प्रेम मंत्रालय’ में ले जाया जाता है, जहां उसे भयानक यातनाएं दी जाती हैं। 
  • आखिरकार, उसे इतना मजबूर कर दिया जाता है कि वह खुद सरकार के समर्थन में खड़ा हो जाता है। 

यह उपन्यास दिखाता है कि अगर कोई सरकार असीमित ताकत हासिल कर लेती है, तो वह अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। 

जयंत चौधरी ने जब ‘1984’ का जिक्र किया, तो इसका मतलब था कि पुलिस और सरकार की नीतियां धीरे-धीरे उसी दिशा में बढ़ रही हैं, जहां हर चीज पर नियंत्रण, डर और निगरानी का माहौल हो। 

मेरठ पुलिस का आदेश, जिसमें सड़क पर नमाज पढ़ने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और उनके पासपोर्ट निरस्त करने की बात कही गई, एक ऐसा कदम है जिसे लेकर उन्होंने चिंता जताई। 

  • जॉर्ज ऑरवेल का असली नाम एरिक आर्थर ब्लेयर था और उनका जन्म भारत के बिहार के मोतिहारी में हुआ था। 
  • उन्होंने ब्रिटिश पुलिस में नौकरी भी की थी, लेकिन 1927 में इसे छोड़कर लेखक बन गए। 
  • उन्होंने यह उपन्यास 1947-48 के दौरान लिखा, जब वे गंभीर रूप से बीमार थे। 
  • 1949 में ‘1984’ प्रकाशित हुआ और 1950 में उनकी मृत्यु हो गई। 

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