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Akhilesh Yadav : जाति जनगणना पर केंद्र के फैसले को अखिलेश यादव ने बताया ‘PDA की जीत’, जानिए अब तक का पूरा इतिहास

by | Apr 30, 2025 | अपना यूपी, बड़ी खबर, मुख्य खबरें, राजनीति

Akhilesh Yadav : केंद्र सरकार ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए घोषणा की है कि आगामी जनगणना में जातिगत गणना को “पारदर्शी” तरीके से शामिल किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया। राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCPA) द्वारा लिए गए इस फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि जनगणना केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है, लेकिन बीते वर्षों में कुछ राज्यों ने सर्वेक्षण के नाम पर जातिगत गणना की है, जिससे भ्रम और संदेह फैले।

इस बड़े फैसले के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav ) का भी बयान सामने आया है। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा “जाति जनगणना का फैसला 90% पीडीए की एकजुटता की 100% जीत है। हम सबके सम्मिलित दबाव से भाजपा सरकार मजबूरन ये निर्णय लेने को बाध्य हुई है। सामाजिक न्याय की लड़ाई में ये पीडीए की जीत का एक अतिमहत्वपूर्ण चरण है।

भाजपा सरकार को चेतावनी है कि अपनी चुनावी धांधली को जाति जनगणना से दूर रखे। एक ईमानदार जनगणना ही हर जाति को अपनी-अपनी जनसंख्या के अनुपात में वो अधिकार और हक़ दिलवाएगी, जिस पर अब तक वर्चस्ववादी फन मारकर बैठे थे।

ये अधिकारों के सकारात्मक लोकतांत्रिक आंदोलन का पहला चरण है और भाजपा की नकारात्मक राजनीति का अंतिम। भाजपा की प्रभुत्ववादी सोच का अंत होकर ही रहेगा। संविधान के आगे मनविधान लंबे समय तक चल भी नहीं सकता है। ये INDIA की जीत है!”

भारत में आखिरी जनगणना वर्ष 2011 में कराई गई थी। यह आज़ाद भारत की सातवीं और कुल मिलाकर देश की 15वीं जनगणना थी। यह जनगणना दो चरणों में हुई थी।

  • गृह सूचीकरण और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) — अप्रैल से सितंबर 2010 तक
  • जनसंख्या गणना — 9 फरवरी से 28 फरवरी 2011 तक

इस जनगणना में भारत की कुल आबादी 121 करोड़ से ज्यादा दर्ज की गई थी।

  • पुरुष: लगभग 62.3 करोड़
  • महिलाएं: लगभग 58.7 करोड़
  • जनसंख्या वृद्धि दर: 17.64%
  • साक्षरता दर: 74.04%

2021 की जनगणना को पहले कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया। बाद में प्रशासनिक और राजनीतिक विवादों, जैसे कि CAA (नागरिकता संशोधन अधिनियम) और NPR अपडेट, के चलते इसे लगातार टाला गया। यह जनगणना भारत की पहली डिजिटल जनगणना होने वाली थी, जिसमें मोबाइल ऐप और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डेटा इकट्ठा किया जाना था। लेकिन राजनीतिक असहमति और तकनीकी तैयारियों की कमी के कारण प्रक्रिया जटिल हो गई।

भारत में आखिरी पूर्ण जाति आधारित जनगणना 1931 में ब्रिटिश शासन के दौरान कराई गई थी। इसमें पहली और आखिरी बार सभी जातियों के आंकड़े एकत्र किए गए थे।

  • 1941 की जनगणना द्वितीय विश्व युद्ध के कारण अधूरी रह गई थी।
  • 1951 के बाद, स्वतंत्र भारत में केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की ही गणना होती रही है।
  • 2011 में SECC (सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना) कराई गई, लेकिन इसमें एकत्र किए गए जातिगत आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए। इसका कारण बताया गया कि लगभग 46 लाख जातियों के नामों की वर्तनी में अंतर और उनकी सत्यापन की कठिनाई के कारण डेटा को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका।

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