Atishi News : दिल्ली के निजी स्कूलों में हो रही मनमानी फीस वृद्धि को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। बुधवार को नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर कहा कि अगर भाजपा सरकार का निजी स्कूल फीस रेगुलेशन बिल लाने का उद्देश्य वास्तव में पारदर्शिता और अभिभावकों को राहत देना है, तो उसे तत्काल प्रभाव से इस वर्ष की फीस वृद्धि को वापस लेने का आदेश देना चाहिए।
आतिशी ने पत्र में लिखा कि मंगलवार को दिल्ली सरकार ने स्कूल फीस रेगुलेशन बिल की घोषणा की, लेकिन यह विधेयक अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होगा। ऐसे में सवाल उठता है कि मौजूदा सत्र 2025-26 के दौरान निजी स्कूलों द्वारा की गई भारी-भरकम फीस बढ़ोतरी का क्या होगा? क्या भाजपा सरकार ने इन स्कूलों को इस वर्ष मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने की खुली छूट दे दी है?
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को तत्काल आदेश जारी कर इस वर्ष की गई सभी फीस वृद्धि और अतिरिक्त शुल्कों को वापस लेने को कहना चाहिए, अन्यथा आने वाले वर्षों के लिए लाया जा रहा नया कानून सिर्फ दिखावा बनकर रह जाएगा।
आतिशी ने लगाया गंभीर आरोप
आतिशी ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री को यह भी याद दिलाया कि दिल्ली कैबिनेट ने “दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) विधेयक 2025” को मंजूरी दी है, जिसकी जानकारी उन्हें समाचार पत्रों और मुख्यमंत्री के एक्स हैंडल के जरिए मिली। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पारदर्शी फीस संरचना का दावा करता है, लेकिन इसके मसौदे की प्रक्रिया ही पूरी तरह से अपारदर्शी रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अब तक न तो मसौदा सार्वजनिक किया है और न ही इसमें हितधारकों से कोई सलाह-मशविरा किया गया है। ऐसे में विपक्ष के पास न तो इस पर टिप्पणी करने के लिए कोई आधिकारिक दस्तावेज है और न ही इसे लेकर कोई पारदर्शिता दिखाई दे रही है।
कई निजी स्कूलों ने मनमाने ढंग से बढ़ाई फीस
Atishi ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार के गठन के तुरंत बाद दिल्ली के कई निजी स्कूलों ने मनमाने ढंग से फीस बढ़ा दी, जिससे अभिभावकों और छात्रों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा। कई छात्रों को सिर्फ इसलिए कक्षा में बैठने नहीं दिया गया क्योंकि उनके माता-पिता फीस जमा नहीं कर पाए। इस मुद्दे को लेकर अभिभावकों को भीषण गर्मी में स्कूलों के बाहर प्रदर्शन तक करने पड़े और कुछ मामलों में उन्हें अदालत का दरवाजा भी खटखटाना पड़ा।
उन्होंने बताया कि अप्रैल 2025 की शुरुआत में दिल्ली के कई प्राइवेट स्कूलों ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए फीस में 30 से 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी। इसके साथ ही एयर कंडीशनिंग, स्विमिंग, एक्टिविटी क्लास जैसी सुविधाओं के नाम पर भारी-भरकम शुल्क लगाए गए। साथ ही, छात्रों को महंगी किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए विशेष दुकानों का सहारा लेने को मजबूर किया गया।
उन्होंने सवाल किया कि इस वर्ष जिन अभिभावकों को मनमानी फीस वृद्धि का सामना करना पड़ा है, उनका क्या होगा? क्या उन्हें इन भारी शुल्कों को मजबूरी में चुकाना पड़ेगा?
Atishi ने दिल्ली सरकार को दिए चार अहम सुझाव
- मौजूदा शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए निजी स्कूलों द्वारा की गई सभी शुल्क वृद्धि और नए शुल्कों को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
- जिन स्कूलों ने पहले ही बढ़ी हुई फीस वसूल ली है, उन्हें वह राशि अभिभावकों को वापस लौटाने का आदेश दिया जाए।
- जब तक नया अधिनियम लागू न हो जाए, तब तक किसी भी स्कूल को फीस बढ़ाने या नए शुल्क लगाने की अनुमति न दी जाए।
- प्रस्तावित ड्राफ्ट बिल को सार्वजनिक डोमेन में रखा जाए ताकि सभी हितधारक अपनी राय दे सकें और फीडबैक के आधार पर ही इसे विधानसभा में पेश किया जाए।


