India Pakistan Indus Waters Treaty: भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) के तहत बनी Court of Arbitration को लेकर बड़ा बयान जारी किया है। विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि वह हेग में बनी इस तथाकथित मध्यस्थता अदालत को न तो मान्यता देता है और न ही उसकी किसी कार्यवाही को वैध मानता है। भारत का कहना है कि यह कोर्ट पाकिस्तान के इशारे पर किया गया एक नया “नाटक” है, जिसका मकसद केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाना और आतंकवाद से ध्यान भटकाना है।
गौरतलब है कि इस अदालत ने किशनगंगा और रातले परियोजनाओं से संबंधित मामलों की सुनवाई को लेकर अपनी क्षमता पर एक Supplemental Award जारी किया है। इस पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
भारत का सीधा जवाब
भारत ने 13 अक्टूबर 2022 को ही Court of Arbitration की वैधता को चुनौती दी थी, जब विश्व बैंक ने एक साथ न्यूट्रल एक्सपर्ट और मध्यस्थता अदालत – दोनों की नियुक्ति कर दी थी। भारत का कहना है कि यह कदम खुद सिंधु जल संधि का उल्लंघन है।
विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा:
“भारत ने कभी भी इस तथाकथित Court of Arbitration को मान्यता नहीं दी है। यह मंच और इसकी कार्यवाही, दोनों ही पूरी तरह अवैध हैं। पाकिस्तान की तरफ से आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी जिम्मेदारी से बचने की यह एक और कोशिश है।”
क्या है मामला?
भारत जम्मू-कश्मीर में झेलम की सहायक नदी पर किशनगंगा परियोजना और चेनाब नदी पर रातले परियोजना का निर्माण कर रहा है। पाकिस्तान को इन प्रोजेक्ट्स के डिज़ाइन पर आपत्ति थी। 2015 में पाकिस्तान ने विश्व बैंक से न्यूट्रल एक्सपर्ट नियुक्त करने की मांग की, लेकिन 2016 में उसने अपना रुख बदलते हुए Court of Arbitration की मांग कर दी।
विश्व बैंक ने दोनों ही मांगों को स्वीकार करते हुए एक ओर न्यूट्रल एक्सपर्ट मिशेल लिनो की नियुक्ति की और दूसरी ओर हेग में मध्यस्थता अदालत बना दी। भारत तभी से इसका विरोध कर रहा है।
‘संधि को स्थगित कर चुका है भारत‘
भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद 2023 में सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस वक्त साफ शब्दों में कहा था
“पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।”
उसके बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की जल-बांटवारे से जुड़ी प्रक्रिया को रोक दिया और इसे एक सॉवरेन स्टेट के रूप में अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत अपने अधिकार का प्रयोग बताया।
पाकिस्तान की बौखलाहट
संधि के स्थगन के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को घेरने की कोशिश करता रहा है। अब इसी कड़ी में वह Court of Arbitration के जरिए भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। मगर भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह की अंतरराष्ट्रीय दबाव नीति में झुकेगा नहीं।
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