CM Yogi News: उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। आपको बता दें कि अब 200 नगर पालिका परिषद वाले शहरों में मकानों और दुकानों की डिजिटल मैपिंग की जाएगी। सरकार ने तय किया है कि इन शहरों में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) सर्वेक्षण कराया जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहां पर गृहकर (हाउस टैक्स) की चोरी हो रही है।
इस योजना पर 10.40 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह फैसला नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय तकनीकी समिति (SLTC) की बैठक में लिया गया।
मकान या दुकान? सब आएंगे रडार पर
अब तक कई नगर पालिकाओं में गृहकर की वसूली सही ढंग से नहीं हो पा रही थी। बहुत से लोग अपने मकान, दुकान या इमारतें रजिस्टर्ड ही नहीं कराते, जिससे सरकारी राजस्व का नुकसान होता है।
अब सरकार ने तय किया है कि नगर निगमों की तरह नगर पालिकाओं में भी GIS सर्वे होगा, जिससे:
- हर संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा
- भवन का आकार, स्वामित्व, कर की स्थिति सब कुछ कंप्यूटर में दर्ज होगा
- नई संपत्तियों को भी रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा
- पुराने या अधूरे रिकॉर्ड को अपडेट किया जाएगा
क्यों जरूरी है ये सर्वे?
इस सर्वे का मकसद साफ है।
- गृहकर वसूली बढ़ाना
- नगर निकायों को आत्मनिर्भर बनाना
- ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देना
- लोगों को घर बैठे ऑनलाइन टैक्स भरने की सुविधा देना
सरकार कह रही है कि इससे हर शहर को उसके असली टैक्स मिल पाएंगे और वो पैसे शहर की सफाई, रोशनी, सड़क जैसी ज़रूरी सेवाओं पर खर्च किए जा सकेंगे।
अमृत योजना के तहत ज़रूरी हुआ सर्वे
यह सर्वे “अमृत-दो” योजना के तहत कराया जा रहा है। अमृत योजना में सरकार शहरी इलाकों को बेहतर सुविधाएं देने पर काम कर रही है। जैसे पानी, सीवर, सड़कें वगैरह। लेकिन बदले में ये भी ज़रूरी है कि मकान और प्रतिष्ठान मालिक गृहकर जरूर चुकाएं।
अब जब हर प्रॉपर्टी की सैटेलाइट बेस्ड मैपिंग हो जाएगी, तो किसी भी चोरी या गड़बड़ी की संभावना बहुत कम रह जाएगी।
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