Vice President Election Cross Voting: उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आ चुके हैं और इसमें एनडीए (NDA) उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन ने बड़ी जीत दर्ज की है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि उन्हें जितने वोटों की उम्मीद थी, उससे करीब 25 वोट ज्यादा मिले। इसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
कितने वोट मिले?
राधाकृष्णन को कुल 452 वोट मिले, जबकि एनडीए के पास कुल 427 सांसदों का समर्थन था। इसके अलावा वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP) के 11 सांसदों ने भी एनडीए को समर्थन देने की बात कही थी। लेकिन जब रिजल्ट आया, तो यह साफ हुआ कि कम से कम 14 वोट ऐसे थे, जो कहीं और से आए हैं। यानी क्रॉस वोटिंग हुई है।
विपक्ष को झटका
विपक्षी गठबंधन INDIA के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को कई वोट मिले, लेकिन 15 वोट अवैध घोषित कर दिए गए। इससे उनका स्कोर और भी कम हो गया। ये अवैध वोट इस बात का संकेत माने जा रहे हैं कि विपक्ष में एकजुटता की कमी है।
क्या है पूरा नंबर गेम?
- निर्वाचक मंडल में कुल 781 सदस्य (राज्यसभा और लोकसभा को मिलाकर)
- 767 सांसदों ने वोट डाला, जिसमें से 15 वोट अवैध पाए गए
- यानी 752 वैध वोट पड़े, जिनमें से राधाकृष्णन को 452 मिले
किसने किया क्रॉस वोटिंग?
बीजेपी और एनडीए के नेताओं का दावा है कि विपक्ष के कई सांसदों ने अपनी पार्टी की लाइन से हटकर राधाकृष्णन को वोट दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड और महाराष्ट्र से कुछ सांसदों ने एनडीए के पक्ष में वोट किया। खास बात ये है कि राधाकृष्णन इन दोनों राज्यों में राज्यपाल रह चुके हैं, तो कुछ लोगों का मानना है कि इसका भी असर पड़ा होगा।
कुछ नेताओं का आरोप है कि AAP और शिवसेना (UBT) के सांसदों ने क्रॉस वोटिंग की, लेकिन इन पार्टियों ने इससे साफ इनकार कर दिया है।
बीजेपी ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “हमारी ताकत 427 थी, लेकिन 452 वोट मिले। इससे साफ है कि कई विपक्षी सांसदों ने भी हमारे उम्मीदवार का समर्थन किया। ये प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और नीतियों पर लोगों के भरोसे को दिखाता है।”
बीजेपी के मुख्य सचेतक संजय जायसवाल ने तो यह तक कहा कि, “करीब 40 विपक्षी सांसदों ने अंतरात्मा की आवाज सुनकर राधाकृष्णन को वोट दिया।”
क्या कहता है ये नतीजा?
इस चुनाव ने दो बातें साफ कर दी हैं।
- NDA की स्थिति मजबूत है, और उसके बाहर के भी कुछ सांसद अब उनके साथ खड़े होते दिख रहे हैं।
- विपक्ष की एकता सवालों के घेरे में है, क्योंकि या तो सांसदों ने क्रॉस वोटिंग की या फिर जानबूझकर वोट को अवैध बना दिया।
अब आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये नतीजे सिर्फ एक चुनाव की तस्वीर नहीं दिखा रहे, बल्कि यह भी बता रहे हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद संसद में शक्ति संतुलन किस तरफ झुक रहा है। एनडीए को इसका बड़ा फायदा मिल सकता है।
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