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Delhi-Dehradun Expressway: अब दिल्ली से देहरादून सिर्फ ढाई घंटे में, सफर होगा आसान और आरामदायक

by | Jan 12, 2026 | बड़ी खबर, मुख्य खबरें

Delhi-Dehradun Expressway: दिल्ली से देहरादून का सफर हमेशा खूबसूरत माना जाता रहा है। रास्ते में पहाड़, हरियाली और ठंडी हवा मन को सुकून देती है, लेकिन ट्रैफिक जाम, खराब सड़कें और बार-बार रुकने वाली बसें इस सफर को थकाने वाला बना देती थीं। अब जल्द ही यह तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है।

करीब 210 किलोमीटर लंबा दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर लगभग बनकर तैयार है और फरवरी के पहले हफ्ते के बाद किसी भी दिन इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। इस सड़क के शुरू होते ही दिल्ली से देहरादून की दूरी महज ढाई घंटे में तय की जा सकेगी।

दिल्ली से निकलते ही आपको एक आधुनिक एक्सेस-कंट्रोल हाईवे मिलेगा। तेज रफ्तार, स्मूद सड़क, सुरक्षित अंडरपास, बड़े इंटरचेंज, टोल प्लाजा और आरामदायक पिट स्टॉप—सब कुछ इस कॉरिडोर को देश के बेहतरीन हाई-स्पीड रास्तों में शामिल करता है। इसी वजह से लोग इसे एक्सप्रेसवे कहने लगे हैं, हालांकि तकनीकी तौर पर यह एक्सेस-कंट्रोल हाईवे है।

इस कॉरिडोर की शुरुआत दिल्ली के अक्षरधाम से होती है, लेकिन असली आरामदायक सफर गाजियाबाद के लोनी के बाद शुरू होता है। शुरुआती हिस्से में अभी भी कहीं-कहीं गलत दिशा में चलने वाले वाहन नजर आ जाते हैं। अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन के पास ट्रैफिक पहले से ही बड़ा सिरदर्द है।

आगे बढ़ने पर कुछ जगहों पर अभी आखिरी काम चल रहा है कहीं सड़क के किनारे शोल्डर डाले जा रहे हैं, कहीं स्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। मजदूर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं ताकि तय समय पर सड़क पूरी तरह तैयार हो सके।

इस प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में किसानों की मांगों को ध्यान में रखकर कई बदलाव किए गए। करीब 13 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना में खासतौर पर गन्ना किसानों की जरूरतों का ख्याल रखा गया।

मुजफ्फरनगर के करौंदा महाजन इलाके में किसानों ने मांग की थी कि भारी भरकम ट्रैक्टर अंडरपास से आसानी से निकल सकें। इसके लिए सड़क की ऊंचाई एक मीटर बढ़ाकर 5.5 मीटर कर दी गई। सहारनपुर के बादगांव में स्थानीय विरोध के बाद एक अतिरिक्त इंटरचेंज बनाया गया। वहीं बिराल इलाके में सिंचाई परियोजना की वजह से पुल बनने में देरी हुई, जो अब लगभग पूरी हो चुकी है।

NHAI के मुताबिक, इस कॉरिडोर के चारों चरणों का 99 फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। बचे हुए छोटे काम अगले 10 दिनों में निपटा लिए जाएंगे। सड़क खुलते ही दिल्ली से देहरादून का सफर कार से तीन घंटे से भी कम समय में पूरा हो सकेगा।

अगर आपके पास FASTag का एनुअल पास है, तो यह सफर और भी सस्ता पड़ेगा। चार टोल प्लाजा पार करने के बाद एक तरफ का खर्च सिर्फ 60 रुपये होगा। बिना एनुअल पास के यह खर्च करीब 500 रुपये आएगा।

इस कॉरिडोर पर कारों की अधिकतम रफ्तार 100 किमी प्रति घंटा और ट्रकों के लिए 80 किमी प्रति घंटा तय की गई है। यानी न बार-बार रुकना पड़ेगा और न ही धीमी रफ्तार से झुंझलाहट होगी।

जिन लोगों ने दिल्ली–जयपुर एक्सप्रेसवे या ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर सफर किया है, उन्हें इस नई सड़क की क्वालिटी का फर्क तुरंत महसूस होगा। सड़क पिछले मॉनसून से पहले ही बिछा दी गई थी, ताकि वह अच्छी तरह बैठ सके। सख्त निगरानी और बेहतर क्वालिटी कंट्रोल की वजह से सफर काफी स्मूद होगा और गाड़ियों की मेंटेनेंस लागत भी कम पड़ेगी।

यह कॉरिडोर चार चरणों में बनाया गया है।

  • पहला चरण अक्षरधाम से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक करीब 31.6 किलोमीटर का है।
  • दूसरा चरण बागपत से सहारनपुर बाईपास तक 120 किलोमीटर लंबा है।
  • तीसरा चरण सहारनपुर बाईपास से गणेशपुर तक करीब 42 किलोमीटर का है।
  • चौथा और आखिरी चरण गणेशपुर से देहरादून तक लगभग 20 किलोमीटर का है।

इस प्रोजेक्ट का सबसे संवेदनशील हिस्सा राजाजी नेशनल पार्क से होकर गुजरता है। यह इलाका हाथियों के कॉरिडोर और नदी के पास होने की वजह से काफी संवेदनशील है। यहां रात में निर्माण पर रोक थी और मॉनसून में नदी के तेज बहाव से काम कई बार रुका। इसके बावजूद NHAI ने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए हैं और सड़क की रोशनी भी इसी हिसाब से लगाई गई है।

इस कॉरिडोर के खुलने से देहरादून, मसूरी, हरिद्वार, ऋषिकेश और सहारनपुर में पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। दिल्ली से वीकेंड ट्रिप अब पहले से कहीं ज्यादा आसान होगी। होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी और लोकल कारोबार को सीधा फायदा मिलेगा।

साथ ही उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी के किसान भी खुश होंगे, क्योंकि उनके गन्ना, सब्जी और फल अब जल्दी दिल्ली के बाजारों तक पहुंच सकेंगे। कुल मिलाकर दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर सिर्फ दूरी कम नहीं करेगा, बल्कि सफर की सोच ही बदल देगा। जो यात्रा पहले थकान और तनाव से जुड़ी थी, अब वही सफर आराम, सुरक्षा और समय की बचत का नाम बन जाएगा।

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