महिलाओं एवं बच्चियों के साथ हो रहे दुष्कर्म थमने का नाम ही ले रहे। क्या हो जब रक्षक ही बक्षक बन जाए। आपको बता दें कि राजस्थान में रक्षक ही भूखे भेड़िये के रूप में घूम रहे है। दौसा (Dausa) से इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। एक चार साल की मासूम बच्ची के साथ राजस्थान पुलिस के सब इंस्पेक्टर ने दुष्कर्म किया। बताया जा रहा है कि दौसा के राहुवास पुलिसथाना क्षेत्र में इस वारदात के पश्चात क्षेत्र के लोगों में आक्रोश बढ़ गया है।
राहुवास पुलिस थाने के बाद सैकड़ो लोग विरोध इस घटना के विरोध में प्रदर्शन करने पहुंचे। आक्रोशित लोग आरोपी सब इंस्पेक्टर के लिए फांसी की मांग कर रहे है। वही एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें आरोपी पुलिस वाले को कुछ ग्रामीणों ने मिलकर पीट दिया। वहीं इस घटना पर अब सियासत गर्म हो गई है। राजस्थान सरकार पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) ने घटना को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
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वसुंधरा राजे ने कांग्रेस को घेरा
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “दौसा में हुई जघन्य घटना पिछले पांच वर्षों में राजस्थान में कांग्रेस द्वारा लाए गए कुशासन का परिणाम है। इस मासूम की चीखें लड़की लोगों के कानों में तब तक गूँजती रहेगी जब तक न्याय नहीं मिल जाता और यह निष्क्रिय सरकार विदा नहीं हो जाती।”
ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी पुलिस इंस्पेक्टर की पहचान भूपेन्द्र सिंह के रूप में हुई है, जो इलाके में किराए के मकान में रहता है। घटना तब घटी जब चार साल की मासूम बच्ची खेलते हुए उसके कमरे के पास पहुंच गई। कथित तौर पर शराब के नशे में सिंह ने बच्चे के साथ दुष्कर्म किया। चौंकाने वाली बात तो ये है कि इस अत्याचार का विरोध करने वाले नाबालिग के पिता के साथ भी इंस्पेक्टर ने मारपीट की है।
बच्ची के पिता को हवालात में डाला
घटनाओं के एक चौंकाने वाले मोड़ में, पुलिस ने कथित तौर पर आरोपी के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने के बजाय उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया। कथित तौर पर पिता को हिरासत में लिया गया और उन पर शारीरिक हमला किया गया, जिसके परिणामस्वरूप उनका हाथ टूट गया। इसके अलावा, यह दावा किया गया है कि इंस्पेक्टर सिंह ने किसी भी सबूत को नष्ट करने के लिए पिता को बच्चे को नहलाने का निर्देश दिया।
यह भयावह घटना एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े उपायों की आवश्यकता और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के भीतर जवाबदेही की तात्कालिकता पर प्रकाश डालती है। राजस्थान के लोग अपना सामूहिक आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं, आरोपियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और मामले से निपटने के लिए अधिकारियों को जवाबदेह ठहरा रहे हैं।


