Bilkis Bano Case : जुर्म इतने घिनौने, की अल्फ़ाज़ भी कम लगते है। जो सोच नहीं सकते अपराधी उससे बढ़कर अपराध करते है। क्या कसूर होता हैं उनका जिनके साथ ये अपराध होते है अब बिलकिस बानो के केस को ही ले लीजिये, आखिर उसने क्या किया था जो 5 माह गर्भवती होने के बावजूद उसके साथ ऐसा हुआ। उसकी आखों के सामने उसके परिवार के सात लोगों को मार दिया गया और उसके साथ दुष्कर्म जैसे घिनौने अपराध को अंजाम दिया।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो मामले में 11 आरोपियों की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने शुक्रवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें आरोपियों के आत्मसमर्पण के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की गई थी, क्योंकि उनके आत्मसमर्पण की समय सीमा 21 जनवरी को समाप्त होने वाली थी।
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आरोपियों ने सरेंडर करने के लिए मांगा समय
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्जल भुइयां ने कहा कि आरोपी द्वारा प्रस्तुत किए गए कारणों में कोई दम नहीं है। पीठ ने टिप्पणी की, “हमने सभी दलीलें सुनी हैं। आवेदकों द्वारा आत्मसमर्पण पर रोक लगाने और जेल वापस रिपोर्ट करने के लिए दिए गए कारणों में कोई दम नहीं है। इसलिए आवेदन खारिज किए जाते हैं।”
बिलकिस बानो मामले में पांचों आरोपियों ने गुरुवार को सरेंडर करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में गुजरात सरकार द्वारा उनकी सजा में दी गई राहत को रद्द कर दिया था। गौरतलब है कि 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो पर बड़े पैमाने पर यौन हमला किया गया था और उनके परिवार के सात सदस्यों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।
गुजरात सरकार के लिए एक फटकार
इस हाई-प्रोफाइल मामले में गुजरात सरकार ने पहले 11 आरोपियों को राहत दी थी। हालांकि शीर्ष अदालत ने 8 जनवरी को इसे रद्द कर दिया था। साथ ही, अदालत ने राज्य सरकार को यह कहते हुए फटकार लगाई थी कि उसकी एक आरोपी के साथ “सांठगांठ” है। आरोपियों को शुरू में स्वतंत्रता दिवस 2022 से पहले रिहा कर दिया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दो सप्ताह के भीतर वापस जेल भेजने का आदेश दिया।


