Abu Azmi Statement On Aurangzeb : महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अबू आजमी के मुग़ल बादशाह औरंगजेब को लेकर दिए गए बयान के बाद सियासी घमासान मच गया है। अबू आजमी के बयान पर प्रदेश के डिप्टी सीएम और शिवसेना के अध्यक्ष एकनाथ शिंदे ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसके बाद राजनीतिक बवाल बढ़ गया है।
एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में कहा कि अबू आजमी देशद्रोही हैं और उन्होंने छत्रपति शिवाजी का अपमान किया है। शिंदे ने आगे कहा कि औरंगजेब ने कई मंदिरों को तोड़ा था, उसकी तारीफ करना भारतीय संस्कृति और मराठा गौरव के खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि अबू आजमी को सदन से निलंबित किया जाए।
अबू आजमी ने क्या कहा था?
अबू आजमी ने औरंगजेब के शासनकाल की तारीफ करते हुए दावा किया था कि औरंगजेब के समय भारत की सीमा अफगानिस्तान और बर्मा तक पहुंच गई थी। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि उस समय भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विश्व के सकल घरेलू उत्पाद का 24 प्रतिशत था और भारत को ‘सोने की चिड़ीया’ कहा जाता था। उनका यह बयान बीजेपी और शिवसेना के नेताओं को खटक गया, जिसके बाद उन पर कड़ी आलोचना की गई।
निलंबन और प्राथमिकी की कार्रवाई
अबू आजमी के इस बयान के बाद सोमवार (3 मार्च) को एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में उनकी निंदा करते हुए कार्रवाई की मांग की। इसके कुछ ही घंटों बाद, नरेश म्हास्के, जो लोकसभा सांसद हैं, ने आजमी के खिलाफ ठाणे में शिकायत दर्ज कराई और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।
सत्ता पक्ष के नेताओं ने भी विधानसभा में हंगामा शुरू कर दिया और अबू आजमी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। विधानसभा के बाहर कुछ नेताओं ने अबू आजमी की तस्वीर पर जूते मारे और उनका विरोध किया।
मंत्री संजय शिरसाट का बयान
महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एबीपी न्यूज़ से बातचीत में कहा कि अबू आजमी का निलंबन पर्याप्त नहीं है, उन्हें जेल में डालना चाहिए। शिरसाट ने यह भी कहा कि अबू आजमी औरंगजेब की बिछड़ी हुई औलाद हैं और ऐसे लोगों को जेल जाना ही चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अबू आजमी के बयान ने धार्मिक भावनाओं को आहत किया है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
राजनीतिक विवाद का तूल पकड़ना
अबू आजमी का बयान महाराष्ट्र में राजनीतिक विवाद को और बढ़ा रहा है। बीजेपी और शिवसेना दोनों ही अबू आजमी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि सपा के नेता अबू आजमी का बचाव करते नजर आ रहे हैं। यह मामला अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि धार्मिक और सांप्रदायिक संवेदनाओं से जुड़ गया है, जिसके चलते इसे लेकर राज्य में सियासी तापमान बढ़ गया है।


