Controversial On Jaya Prada : चुनाव के मौसम में क्या बदल जाती है राजनेताओं की आबोहवा, वह आपत्तिजनक टिप्पणी करने से भी नहीं चूकते। अपने विपक्षी दल पर कटाक्ष या टिप्पणी करना तो आम बात हैं परन्तु किसी भी महिला नेत्री को लेकर अभद्र शब्दों का प्रयोग करना ये कहां तक सही है। ऐसा प्रतीत होता हैं कि चुनावी मौसम अपने साथ अभद्रता लेकर आता हैं। इस मौसम में कई बार राजनेता अपने भाषण में महिला नेत्री को लेकर आपत्तिजनक शब्द बोलते हुए नजर आते है। हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला एक विवादित टिप्पणी करते हुए नजर आए है।
बता दें कि बीजेपी सांसद हेमा मालिनी को लेकर सुरजेवाला ने अभद्र शब्दों का प्रयोग किया है। कांग्रेस नेता के बयान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें उन्हें हेमा मालिनी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करते देखा जा सकता है। सुरजेवाला ने कहा, “विधायक और सांसद इसलिए बनाए जाते हैं ताकि कोई उनकी बात सुने। हेमा मालिनी जैसी कोई, जो फिल्म स्टार भी नहीं है, आप उसे क्यों बनाते हैं?” उन्होंने आगे कहा, ‘वह कोई फिल्म स्टार भी नहीं हैं।’
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आजम खान का वीडियो वायरल
सुरजेवाला का वीडियो प्रसारित होने के बाद बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पार्टी की जमकर आलोचना की है। यह घटना अकेली नहीं है, पहले भी इस तरह के विवाद खड़े हो चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने रामपुर सीट से बीजेपी उम्मीदवार और अभिनेत्री जया प्रदा के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी।
जया प्रदा (Jaya Prada )के बारे में आजम खान की अपमानजनक टिप्पणियों की व्यापक निंदा हुई थी। उनकी अनुचित टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था और राष्ट्रीय महिला आयोग ने नोटिस जारी कर उनके बयानों पर स्पष्टीकरण मांगा था। बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में आजम खान ने रामपुर सीट से जया प्रदा के खिलाफ चुनाव लड़ा था और विजयी हुए थे। हालांकि, बाद में उन्होंने 2022 में राज्य विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सीट खाली कर दी।
ये घटनाएं राजनेताओं को चुनाव प्रचार के दौरान शिष्टाचार बनाए रखने और विशेष रूप से महिला राजनेताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने से बचने की आवश्यकता पर प्रकाश डालती हैं। इस तरह के बयान न केवल उन्हें बनाने वाले व्यक्ति पर बुरा प्रभाव डालते हैं बल्कि जिस राजनीतिक दल का वे प्रतिनिधित्व करते हैं उसकी छवि भी खराब करते हैं। जैसे-जैसे चुनाव का मौसम आगे बढ़ रहा है, सभी राजनीतिक नेताओं के लिए अपने प्रवचन में गरिमा और सम्मान के सिद्धांतों को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।


