Earthquake News: अफगानिस्तान में रविवार देर रात आए भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 622 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। तालिबान शासित गृह मंत्रालय ने जानकारी दी है कि देश के कई हिस्सों में भारी नुकसान हुआ है, खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में।
कई झटकों ने मचाई तबाही
यह भूकंप नांगरहार और कुनार प्रांत में रविवार रात को आया, जिसकी तीव्रता 6.0 मापी गई। इसके बाद 4.5 से लेकर 5.2 तीव्रता तक के तीन और झटके महसूस किए गए। इन झटकों का असर राजधानी काबुल और पड़ोसी देश पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद तक महसूस किया गया।
कुनार में सबसे ज्यादा नुकसान
तालिबान प्रवक्ता ने बताया कि भूकंप से सबसे अधिक नुकसान पहाड़ी कुनार प्रांत में हुआ है। यहां कई गांव पूरी तरह से तबाह हो गए हैं। जन स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता शराफत जमान ने कहा कि मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
राहत कार्यों में आ रही हैं बाधाएं
तालिबान सरकार ने बताया है कि भूकंप प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य में गंभीर कठिनाइयां आ रही हैं। भूस्खलन की वजह से कई सड़कों का संपर्क टूट गया है, जिससे राहत दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में देरी हो रही है। सीमित संसाधनों के चलते भी बचाव कार्यों में परेशानी हो रही है।
अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील
तालिबान अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मदद की अपील की है। उन्होंने कहा है कि जिन क्षेत्रों में सड़क मार्ग बंद हो गया है, वहां पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता है ताकि राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता तेजी से पहुंचाई जा सके।
मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका
तालिबान प्रवक्ता ने यह भी बताया कि कई इलाकों से अभी तक पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है। उन्होंने आशंका जताई है कि मरने वालों और घायलों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी राहत दल नहीं पहुंच सके हैं।
चिकित्सा दल मौके पर तैनात
जन स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, काबुल, नांगरहार और कुनार से चिकित्सा दल प्रभावित क्षेत्रों में भेज दिए गए हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है और उन्हें हर संभव सहायता दी जा रही है।
अफगानिस्तान पहले से ही मानवीय संकट और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में इस भूकंप ने वहां की स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद और स्थानीय प्रशासन की तत्परता ही इस त्रासदी से उबरने में सहायक साबित हो सकती है।
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