Legal Guarantee of MSP : भारत की कृषि अर्थव्यवस्था इन दिनों गंभीर संकट का सामना कर रही है। बढ़ते कर्ज, घटती आय और जलवायु संकट जैसे मुद्दे किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए भारी चुनौतियां बन चुके हैं। पंजाब-हरियाणा सीमा पर फरवरी से आंदोलन कर रहे किसानों की मांगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति ने इन समस्याओं पर गंभीर ध्यान देने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी मान्यता देने की सिफारिश की है। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) नवाब सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों की चुनौतियों को “उभरता हुआ सामाजिक-आर्थिक संकट” करार दिया गया। इस रिपोर्ट को न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुयान की पीठ के सामने प्रस्तुत किया गया।
किसानों के आंदोलन और सरकार का रुख
केंद्र और हरियाणा सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आग्रह किया कि किसान और उनके संगठन अपनी चिंताओं को सीधे अदालत के सामने रखें, साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य सरकार (पंजाब या हरियाणा) के लिए किसानों की ओर से बोलना उचित नहीं है। इस पर, पीठ ने सभी हितधारकों को रिपोर्ट की समीक्षा करने और अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह के लिए सुनवाई स्थगित कर दी।
कृषि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता
समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि ग्रामीण भारत में औसत दैनिक कृषि आय मात्र 27 रुपये है, जो किसानों और कृषि मजदूरों के लिए बेहद चिंताजनक है। बढ़ते कर्ज और घटती कृषि लाभप्रदता ने उन्हें गहरे संकट में डाल दिया है। रिपोर्ट में 1995 से अब तक चार लाख से अधिक किसान आत्महत्याओं का उल्लेख किया गया, जिनका मुख्य कारण कर्जदारी और घटते लाभ हैं।
हरित क्रांति से प्रारंभ में कृषि उत्पादन में वृद्धि तो हुई, लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणामों में स्थिर उपज, अस्थिर फसल पैटर्न और पर्यावरणीय क्षति जैसी समस्याएं सामने आईं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि पंजाब और हरियाणा में क्रमशः 73,673 करोड़ रुपये और 76,630 करोड़ रुपये का संस्थागत कर्ज है, और गैर-संस्थागत कर्ज ने इस बोझ को और बढ़ा दिया है।
जलवायु परिवर्तन और अन्य समस्याएं
रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन को भी एक बड़ी चुनौती बताया गया है। अनियमित वर्षा, गर्मी की लहरें और घटते जल स्तर खाद्य सुरक्षा और कृषि स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। इसके अलावा, फसल अवशेष प्रबंधन की समस्या भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पराली जलाने से पर्यावरणीय प्रदूषण और जनस्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो रहे हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर समय रहते इन समस्याओं पर नीति-स्तरीय हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो ये और गंभीर हो सकती हैं।
MSP की कानूनी गारंटी की मांग
किसानों की प्रमुख मांगों में एमएसपी को कानूनी मान्यता देना शामिल है। समिति की रिपोर्ट ने किसानों में विश्वास बहाल करने के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी पर विचार करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कृषि क्षेत्र की लाभप्रदता सुनिश्चित करने के लिए एमएसपी, प्रत्यक्ष आय समर्थन और अन्य व्यावहारिक दृष्टिकोणों का मूल्यांकन करना अत्यंत आवश्यक है।
समाज और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ग्रामीण श्रमिकों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों की स्थिति अत्यंत कठिन है। ग्रामीण मजदूरों का एक बड़ा हिस्सा गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहा है। समिति ने इस संकट के समाधान के लिए फसल विविधीकरण, पर्यावरण-अनुकूल खेती और मजबूत संस्थागत ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था पर मंडराते संकट को कम किया जा सके।
जानिए किसानों के आंदोलन में क्या-क्या हुआ
यह समिति उस समय गठित की गई थी, जब फरवरी से पंजाब-हरियाणा सीमा पर किसानों का आंदोलन चल रहा था। किसानों ने अपनी मांगों के समाधान के लिए सड़कों को जाम कर रखा था। इस आंदोलन के दौरान खनौरी में किसानों और हरियाणा पुलिस के बीच हुई झड़प में 21 वर्षीय शुभकरण सिंह की मौत हो गई थी। इस घटना की जांच के लिए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ हरियाणा सरकार की अपील मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले गई थी।


