Mahoba Voter List: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कुछ महीने पहले जब फर्जी वोटर और वोट चोरी का मुद्दा उठाया था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि ऐसी गड़बड़ियां इतने बड़े पैमाने पर सामने आएंगी। लेकिन अब यूपी के महोबा जिले से जो मामला सामने आया है, उसने वाकई सभी को चौंका दिया है।
यहां एक ही घर में 243 वोटर दर्ज हैं! जी हां, आप सही सुन रहे हैं। 243 वोटर एक ही मकान में! और ऐसा सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि कई घरों के साथ हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
महोबा जिले की पनवाड़ी ग्राम पंचायत के वार्ड नंबर 13 में मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी देखने को मिली है।
- मकान नंबर 997 में 243 वोटर दर्ज हैं।
- मकान नंबर 996 में 185 वोटर पाए गए।
- और मकान नंबर 1702 में 29 मतदाता दर्ज हैं।
जब यह सूची मोहल्ला बजनापुरा के स्थानीय निवासी रविन्द्र कुमार अहिरवार को दिखाई गई, तो वह हैरान रह गए। उन्होंने बताया कि उनके मकान में तो असल में सिर्फ 6 लोग ही वोटर हैं, जबकि उनके चाचा के घर में सिर्फ 2 लोग रहते हैं। फिर इतने सारे वोटर कैसे?
फर्जी वोटर या सिस्टम की लापरवाही?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बड़ी लापरवाही का मामला है। सभासद बबलू और ग्रामीण राकेश कुमार ने बताया कि यह सिर्फ आंकड़ों की गलती नहीं, बल्कि एक गंभीर चुनावी चूक है।
इतना ही नहीं, अनुसूचित जाति बहुल इस वार्ड की सूची में ब्राह्मण और मुस्लिम परिवारों के नाम अनुसूचित जाति के घरों पर दर्ज कर दिए गए हैं। अब लोग सवाल उठा रहे हैं। क्या यह सब गलती से हुआ है या इसके पीछे कोई और कारण है?
अधिकारियों की सफाई
स्थानीय बीएलओ जयप्रकाश वर्मा ने बताया कि उन्होंने ये गड़बड़ियां देखकर तुरंत इसकी जानकारी ऊपर के अधिकारियों को दे दी है। वहीं, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी आरपी विश्वकर्मा ने कहा कि यह सिर्फ प्रारंभिक सूची है और अंतिम प्रकाशन से पहले मकान नंबरों को सही किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि नंबरों को क, ख, ग जैसे उपसंख्याओं में बांटकर सुधार किया जाएगा ताकि यह भ्रम दूर हो।
अब लोगों की नजरें आयोग पर
इस पूरी घटना ने पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग अब जानना चाहते हैं कि निर्वाचन आयोग इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और क्या इस गड़बड़ी की जांच कर दोषियों पर कोई कार्रवाई होगी।
बहरहाल, मतदाता सूची में इस तरह की गड़बड़ी से न सिर्फ चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, बल्कि आम लोगों का भरोसा भी डगमगाता है। अब देखना ये है कि ये मामला सिर्फ “सुधार की प्रक्रिया में है” कहकर रफा-दफा किया जाता है या सच में ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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