Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 123वें एपिसोड में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी एक ऐतिहासिक उपलब्धि का उल्लेख करते हुए देशवासियों को एक गर्व की खबर दी। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत को ट्रैकोमा-फ्री देश घोषित कर दिया है। यह उपलब्धि देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सतत प्रयासों और जागरूकता अभियानों का परिणाम है।
क्या है ट्रैकोमा?
प्रधानमंत्री ने बताया कि ट्रैकोमा एक संक्रामक नेत्र रोग है, जो बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होता है। यह बीमारी एक समय देश के कई हिस्सों में आम थी और अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह आंखों की रोशनी तक छीन सकती है। यह बीमारी आमतौर पर गरीब और साफ-सफाई से वंचित इलाकों में अधिक फैलती थी।
सरकार का संकल्प और रणनीति
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार ने ट्रैकोमा जैसी घातक बीमारी को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया था। इसके तहत:
- स्वच्छता अभियान को प्राथमिकता दी गई।
- आंखों की जांच, इलाज और जनजागरूकता पर बल दिया गया।
- साफ पानी, स्वच्छता और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों तक पहुंचाया गया।
इन प्रयासों के चलते धीरे-धीरे ट्रैकोमा के मामलों में कमी आने लगी और अब यह बीमारी स्वास्थ्य के लिए कोई सार्वजनिक खतरा नहीं रह गई है।
डब्ल्यूएचओ की घोषणा और वैश्विक मान्यता
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आज यह बताते हुए उन्हें बहुत खुशी हो रही है कि भारत ने इस दिशा में अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है और WHO ने आधिकारिक रूप से भारत को ट्रैकोमा-फ्री देश घोषित कर दिया है।
यह मान्यता वैश्विक स्तर पर भारत की स्वास्थ्य सेवाओं की सशक्तता को भी दर्शाती है।
क्या है इसका महत्व?
ट्रैकोमा से मुक्ति सिर्फ एक स्वास्थ्य उपलब्धि नहीं, बल्कि यह जनकल्याण, नीतिगत प्रतिबद्धता और जागरूक नागरिक भागीदारी का परिणाम है। इस सफलता से यह भी सिद्ध होता है कि जब सरकार और समाज एकजुट होकर किसी लक्ष्य के लिए काम करते हैं, तो सबसे कठिन बीमारियों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है।
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