PM Modi : हम आपको बताते हैं, भारत दर्शन के दौरान, विवेकानंद ने आम लोगों के दुख, दर्द, गरीबी, आत्मसम्मान और शिक्षा की कमी को निकट से जाना था। विवेकानंद ने 24 दिसंबर 1892 को समुद्र तट से लगभग 500 मीटर दूर स्थित एक चट्टान तक तैरकर पहुंचे। 25 से 27 दिसंबर तक उन्होंने इस चट्टान पर ध्यान किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कन्याकुमारी की यात्रा पर हैं। उन्हें 1 जून की शाम तक विवेकानंद रॉक स्मारक में ध्यान करने की योजना है। आज उनकी ध्यानधारणा का दूसरा दिन है। पीएम मोदी की ध्यानधारणा का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें पीएम मोदी को संफेद कुर्ता और गमछा पहने हुए दिखाया गया है। वे स्वामी विवेकानंद की मूर्ति के सामने बैठे हुए ध्यान कर रहे हैं। उनके हाथों में माला है और ॐ की ध्वनि गूंज रही है।
इस ध्यान मंडपम की विशेषता यह है कि यहीं है जहां स्वामी विवेकानंद ने देश के भ्रमण के बाद तीन दिनों तक ध्यान किया था। यहां ही उन्होंने एक विकसित भारत के सपने देखे थे। माना जाता है कि इस स्थान पर देवी पार्वती ने एक पैर पर खड़ी होकर ध्यान किया था।
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पीएम मोदी ने गुरुवार को कन्याकुमारी पहुंचा। प्रधानमंत्री दक्षिण भारत के परंपरागत पहनावे में एक धोती पहने हुए दिखाई दिए। उन्होंने एक ऑफ-व्हाइट कलर की शॉल पहनी थी। कन्याकुमारी पहुंचने के बाद, उन्होंने भगवती अम्मन मंदिर में पूजा-अर्चना की। आपको बता दें, प्रधानमंत्री मोदी हर बार सामान्य चुनाव के अभियान के बाद आध्यात्मिक यात्रा पर जाते हैं, और 2019 चुनाव के अभियान के बाद, उन्होंने केदारनाथ जाकर अवकाश बिताया था और 2014 में उन्होंने शिवाजी महाराज से संबंधित प्रतापगढ़ जाकर यात्रा की थी।
ये है PM का पूरा कार्यक्रम
पीएम मोदी के कार्यक्रम को लेकर मिली जानकारी के अनुसार 30 मई दोपहर बाद आध्यात्मिक प्रवास के लिए कन्याकुमारी पहुंचें। उसके पश्चात विवेकानंद रॉक मेमोरियल आए। यहां पर वह 30 मई से एक जून तक ध्यान मंडपम में ध्यान लगाएंगे। पीएम मोदी इस दौरान पूजा-अर्चना करेंगे और फिर एक जून को दिल्ली के लिए यहां से रवाना हो सकते हैं। सूत्र कहते है कि पीएम मोदी दिल्ली जाने से पहले तमिल कवि तिरुवल्लुवर की प्रतिमा देखने के लिए भी जा सकते हैं।
यहीं पर उन्होंने भारत माता की किए थे दर्शन
भारत दर्शन के दौरान विवेकानंद ने आम लोगों के दुख, दर्द, गरीबी, स्वाभिमान और शिक्षा की कमी को निकट से जाना था। विवेकानंद ने 24 दिसंबर 1892 को समुद्र तट से लगभग 500 मीटर दूर स्थित एक चट्टान तक तैरकर पहुंचा। 25 से 27 दिसंबर तक उन्होंने इस चट्टान पर ध्यान किया। यहां पर उन्होंने भारत के भविष्य के लिए एक विकसित भारत का सपना देखा था। यहीं है जहां उन्होंने लोगों के लिए अपने जीवन की बाकी अवधि समर्पित करने का सपना देखा था। विवेकानंद शिला पर विवेकानंद स्मारक बनाने के लिए लम्बा संघर्ष रहा है। इसमें एकनाथ राणाडे का बड़ा योगदान रहा है।

PM मोदी ने किए 183 रैलियों और रोड शो
प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने गुरुवार को पंजाब के होशियारपुर में एक रैली के साथ अपना चुनावी अभियान समाप्त किया। अब छठे और अंतिम चरण के मतदान 1 जून को होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा को फिर से सत्ता में लाने के लिए प्रचार किया। प्रधानमंत्री मोदी ने 16 मार्च को कन्याकुमारी से अपना चुनावी अभियान शुरू किया था। पिछले 75 दिनों में, प्रधानमंत्री ने 183 चुनाव कार्यक्रमों में भाग लिया। इनमें चुनावी रैलियों और रोड शोज़ शामिल हैं। इनके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न मीडिया संगठनों को लगभग 80 इंटरव्यू दिए, जिनमें उन्होंने सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों पर चर्चा की। साथ ही, धार्मिक आधार पर आरक्षण, सीएए, अयोध्या के राम मंदिर और धारा 370 जैसे विषयों पर विपक्षी पार्टियों को भी आलोचना की गई।
कन्याकुमारी कई तरह से विशेष
कन्याकुमारी भारत के लिए कई तरह से विशेष है। यहां पर भारत की पूर्वी और पश्चिमी किनारे मिलते हैं। अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी कन्याकुमारी में मिलते हैं। कन्याकुमारी जाकर, प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया है।
राष्ट्रीय एकता का संकेत
इस भूगोलीय क्षेत्र का और एक महत्व यह है कि कन्याकुमारी का यह स्थान भारत का दक्षिणीतम अंत है। इसके अलावा, भारत के पूर्वी और पश्चिमी किनारे भी इस स्थान पर मिलते हैं। यह भारतीय महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के मिलने का स्थान भी है। विशेषज्ञों के अनुसार, कन्याकुमारी जाने से प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय एकता का संकेत दे रहे हैं।


