Waqf News : वक्फ विधेयक को लेकर बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए सांसदों के द्वारा सुझाए गए सभी सुझावों को स्वीकार कर लिया है। हालांकि विपक्षी सांसदों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि उनके सुझावों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। विपक्ष का कहना है कि उन्हें सुना नहीं जा रहा और उनकी राय का कोई महत्व नहीं दिया जा रहा।
जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि समिति द्वारा किए गए बदलावों से कानून को और अधिक प्रभावशाली और मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ये बदलाव विधेयक को बेहतर बनाने के लिए किए गए हैं, जिससे वक्फ संपत्तियों के संचालन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता आएगी।
विपक्ष का आरोप
विपक्षी सांसदों ने जेपीसी की बैठकों के दौरान लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन का आरोप लगाया। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद और जेपीसी के सदस्य कल्याण बनर्जी ने कहा कि जेपीसी की बैठकों में उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल तानाशाही तरीके से कार्य कर रहे हैं और पूरी प्रक्रिया को हास्यास्पद करार दिया।
इस पर जगदंबिका पाल ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक तरीके से हुई और सभी फैसले बहुमत के आधार पर लिए गए। उनका कहना था कि यह आरोप निराधार हैं और उन्हें किसी भी तरीके से सही नहीं ठहराया जा सकता।
विधेयक में प्रस्तावित अहम संशोधन
विधेयक में प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण संशोधन यह है कि वर्तमान कानून में यह प्रावधान था कि वक्फ संपत्तियों पर सवाल नहीं उठाए जा सकते, लेकिन नए विधेयक में इसे हटा दिया गया है। इससे वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और नियंत्रण में और अधिक पारदर्शिता की संभावना जताई जा रही है।
जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने यह स्पष्ट किया कि एनडीए सदस्यों द्वारा विधेयक के 14 खंडों में किए गए संशोधनों को स्वीकार कर लिया गया है, जबकि विपक्षी सदस्यों द्वारा पेश किए गए 44 खंडों में सैकड़ों संशोधनों को खारिज कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि ये बदलाव विधेयक को बेहतर और प्रासंगिक बनाने के लिए किए गए हैं, और अब विधेयक एक मजबूत कानून बनकर सामने आएगा।


