Puri Rath Yatra Stampede: पुरी रथ यात्रा में रविवार को मची भगदड़ ने न सिर्फ तीन श्रद्धालुओं की जान ले ली, बल्कि दर्जनों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। हादसा गुंडिचा मंदिर के पास तब हुआ जब ‘आदापा मंडप दर्शन’ के लिए अनुमानित संख्या से कई गुना अधिक श्रद्धालु इकट्ठा हो गए। हादसे की गंभीरता को श्रद्धालुओं और पीड़ित परिवारों के बयान बयां कर रहे हैं, जो दर्द से भरे और व्यवस्था की पोल खोलने वाले हैं।
प्रशासनिक लापरवाही की तस्वीर सबसे ज्यादा मार्मिक रूप से सामने आई दिलीप कुमार साहू की कहानी में, जिनकी पत्नी इस भगदड़ में दम तोड़ गईं।
पीड़ित ने खोई अपनी पत्नी, गम में डूबा परिवार
गहरे सदमे में डूबे दिलीप कुमार साहू ने कहा, “मेरी पत्नी मेरे साथ दर्शन के लिए आई थीं। अचानक भीड़ बेकाबू हो गई। वह गिर पड़ीं और लोग उन्हें रौंदते चले गए। मैं चिल्लाता रहा, मदद की गुहार लगाता रहा – कोई पुलिसवाला नहीं दिखा, कोई एम्बुलेंस नहीं आई। करीब एक घंटे तक हम मदद का इंतजार करते रहे।”
दिलीप बताते हैं कि अंत में उन्होंने खुद अपनी पत्नी को गोद में उठाया और भीड़ से बाहर लाए। “अगर समय पर एम्बुलेंस होती, या पुलिस होती जो रास्ता खाली कर पाती, तो मेरी पत्नी आज जिंदा होती,” उन्होंने रोते हुए कहा।
उनका यह बयान सिर्फ एक पीड़ित की गुहार नहीं, बल्कि पूरे तंत्र पर एक करारा तमाचा है। भगदड़ के दौरान किसी भी तरह की मेडिकल इमरजेंसी सेवा और पुलिस की मौजूदगी का न होना राज्य प्रशासन की भारी चूक को उजागर करता है।
हादसे के वक्त कई श्रद्धालु घंटों तक घायल अवस्था में जमीन पर पड़े रहे, किसी की सुध लेने वाला कोई नहीं था। कई ने बताया कि मेडिकल टीम घटनास्थल पर समय से नहीं पहुंची, जिससे घायलों की हालत और बिगड़ती चली गई।
ओडिशा CM ने जताया गहरा दुख
मुख्यमंत्री मोहन मांझी ने इस घटना को प्रशासनिक विफलता मानते हुए चार वरिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया और मृतकों के परिजनों को ₹25 लाख मुआवजा देने की घोषणा की। लेकिन सवाल बना हुआ है कि क्या सिर्फ मुआवजे से उन परिवारों के दर्द की भरपाई हो सकती है, जिन्होंने अपनों को अपनी आंखों के सामने खो दिया?
यह हादसा महज़ एक व्यवस्था की चूक नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ हुआ विश्वासघात है, जिसे माफ नहीं किया जा सकता। अब ज़रूरत है निष्पक्ष जांच, ठोस जवाबदेही और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस योजना की।
हमारी इंटर्न सुनिधि सिंह द्वारा लिखी गयी है।
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