Akhilesh Yadav News : लोकसभा चुनाव से ठीक पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम उठाते हुए राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के अध्यक्ष जयंत चौधरी समाजवादी पार्टी (एसपी) प्रमुख अखिलेश यादव का साथ छोड़कर बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल हो गए। चौधरी ने बीजेपी के साथ मिलकर दो सीटों पर चुनाव लड़ा और विजयी हुए। वर्तमान में वे मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं, उनकी पार्टी एनडीए का हिस्सा है। हालांकि, हाल ही में जयंत चौधरी ने बीजेपी सरकार के कुछ फैसलों पर खुलकर असंतोष जताया है। इससे उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में संभावित बड़े बदलाव के बारे में राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। क्या जयंत चौधरी एक बार फिर अखिलेश यादव के साथ मिल सकते हैं?
अखिलेश यादव ने अटकलों पर दिया जवाब
एसपी प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने हाल ही में हमारे सहयोगी ‘मीडिया’ के साथ एक साक्षात्कार में इन अटकलों पर जवाब दिया। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि जयंत चौधरी फिर से उनके साथ मिल सकते हैं, तो अखिलेश का जवाब राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
जयंत चौधरी पर टिप्पणी करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “हम राजनीति में किसी की मजबूरी के बारे में नहीं बोल सकते। लोग जहां जाना चाहते हैं, वहीं जाते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “कौन हमारे साथ जुड़ना चाहेगा? हमारे पास देने के लिए क्या है? हमारे पास न तो बजट है और न ही मंत्री पद। हम क्या दे सकते हैं? लोग वहीं जाते हैं, जहां उन्हें लाभ दिखता है। अभी हमारे पास क्या लाभ है?”
योगी सरकार के फैसले का विरोध
गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा के दौरान योगी सरकार ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें दुकान मालिकों और कर्मचारियों को अपनी दुकानों पर अपना नाम प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया था, जिस पर काफी विवाद हुआ था। जयंत चौधरी ने इस फैसले की खुलकर आलोचना की थी और कहा था कि भाजपा ने इस फैसले पर ठीक से विचार नहीं किया है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार को यह आदेश वापस लेना चाहिए। इस आलोचना ने जयंत चौधरी और भाजपा के बीच संभावित कलह की अटकलों को हवा दी।


