Akhilesh Yadav : उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के बागी विधायकों पर तंज कसा है। लंबे समय से बागियों पर चुप्पी साधे हुए सपा प्रमुख ने अपनी चुप्पी उस समय तोड़ी जब सपा के तीन बागी विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने एक क्रिप्टिक पोस्ट किया, जिसे बागी विधायकों के लिए उनका सियासी संदेश माना जा रहा है।
इस मुलाकात में शामिल बागी विधायकों में गोसाईंगंज से विधायक अभय सिंह, गौरीगंज से विधायक राकेश प्रताप सिंह और कालपी से विधायक विनोद चतुर्वेदी थे। इन विधायकों ने अमित शाह से मुलाकात की, जिसकी जानकारी अभय सिंह ने एक फोटो शेयर कर दी। इस फोटो में कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी और गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह भी दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा, इस मुलाकात में भाजपा के राज्यसभा सांसद संजय सेठ भी मौजूद थे।
‘जो अपने दर से दगा करता है, वो दर-दर भटकता है’ – Akhilesh Yadav
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में लिखा, “जो अपने दर से दगा करता है, वो दर-दर भटकता है।” इस बयान को सपा के बागी विधायकों के लिए एक स्पष्ट सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह टिप्पणी खासतौर पर उन विधायकों के लिए की गई है, जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में सपा के बजाय भाजपा के पक्ष में मतदान किया था।
बता दें कि राज्यसभा चुनाव के दौरान सपा ने 3 और भाजपा ने 8 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। सपा के करीब 8 विधायकों ने भाजपा के पक्ष में वोट किया, जिसके बाद इन विधायकों को बागी करार दिया गया। इनमें से कुछ विधायक, जैसे कि ऊंचाहार से मनोज पांडेय, पूजा पाल, राकेश पांडेय, और अन्य ने भी भाजपा के पक्ष में मतदान किया था। इन विधायकों की एक तस्वीर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के साथ भी सामने आई थी, जिसमें वे विक्ट्री साइन दिखाते हुए नजर आए थे।
बागी विधायकों की सपा में री-एंट्री पर लगा फुल स्टॉप
लोकसभा चुनाव के बाद यह दावा किया गया था कि ये बागी विधायक सपा में वापस आना चाहते हैं। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव ने सभी बागी विधायकों की सपा में री-एंट्री पर फुल स्टॉप लगा दिया है। इसके बाद से बागी विधायकों का सपा में लौटने का कोई भी प्रयास असफल साबित हुआ है।
अब अखिलेश यादव ने अपने तंज के माध्यम से यह संदेश दिया है कि सपा के साथ विश्वासघात करने वाले बागी विधायकों का भविष्य अनिश्चित है और उन्हें अपनी राजनीतिक यात्रा में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। इस घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं और यह देखना होगा कि आगे क्या स्थिति उत्पन्न होती है।


