Ayodhya Case : उत्तर प्रदेश के अयोध्या में नाबालिग से गैंगरेप के मामले ने तनाव बढ़ा दिया है, जिस पर भाजपा और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) दोनों ने ही ध्यान दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मुद्दे को आक्रामक तरीके से उठाया है, खास तौर पर समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता मोइद खान पर निशाना साधा है, जो कथित तौर पर इस घटना में शामिल हैं।
भाजपा की प्रतिक्रिया
रविवार को भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने अयोध्या पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में अयोध्या के पूर्व मेयर ऋषिकेश उपाध्याय, उत्तर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री नरेंद्र कश्यप, राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद और स्थानीय विधायक वेद प्रकाश गुप्ता शामिल थे। उन्होंने अपनी संवेदना व्यक्त की और परिवार को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के जिला अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव और संजीव सिंह भी शामिल थे।
गिरफ्तारी और जांच
पुलिस ने अयोध्या के भदसवा में बेकरी चलाने वाले मोइद खान को उसके कर्मचारी राजू खान के साथ 30 जुलाई को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, मारपीट की घटना दो महीने पहले हुई थी और घटना की रिकॉर्डिंग भी की गई थी। मामला तब प्रकाश में आया जब मेडिकल जांच में पता चला कि पीड़िता गर्भवती है। मोइद खान कथित तौर पर समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं और सांसद अवधेश प्रसाद की टीम का हिस्सा हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में उल्लेख किया कि मोइद खान के सपा और सांसद की टीम से जुड़े होने के कारण उनके खिलाफ पार्टी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अयोध्या जिला प्रशासन ने शनिवार को खान की बेकरी को ध्वस्त कर दिया।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की संलिप्तता
एनसीपीसीआर ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया है और सरकार से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने पीड़िता की गोपनीयता बनाए रखने और आरोपियों को जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता पर जोर दिया है। एनसीपीसीआर ने एफआईआर, आरोपियों के खिलाफ की गई कार्रवाई, पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट, उसके बयान और उसके इलाज पर रिपोर्ट मांगी है।


