Maha Kumbh 2025 : समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज प्रयागराज महाकुंभ में पहुंचकर संगम में आस्था की डुबकी लगाई। वह पहले ऐसे विपक्षी नेता हैं, जिन्होंने इस महाकुंभ में भाग लिया है। अखिलेश यादव का संगम में स्नान करना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हमलों का जवाब देने के साथ-साथ विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन को भी एक महत्वपूर्ण संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव का महाकुंभ में जाना राजनीतिक दृष्टि से खास है क्योंकि वह विपक्षी दलों के बड़े नेताओं में से पहले ऐसे व्यक्ति हैं, जो महाकुंभ में पहुंचे हैं। इससे पहले उनके कद का कोई बड़ा विपक्षी नेता महाकुंभ में नहीं आया था। अखिलेश यादव ने इस अवसर का लाभ उठाकर न केवल भाजपा के खिलाफ अपनी सख्त स्थिति को रेखांकित किया, बल्कि विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन को भी एक सामूहिक हिंदुत्व और बहुसंख्यक भावनाओं का सम्मान करने का संदेश देने की कोशिश की है।
क्या अन्य विपक्षी दलों के नेता भी महाकुंभ में लेंगे भाग ?
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या अन्य विपक्षी दलों के नेता भी महाकुंभ में भाग लेंगे? अखिलेश यादव के बाद विपक्षी दलों की नजरें इस पर टिकी हुई हैं कि क्या कांग्रेस के प्रमुख नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी इस धार्मिक आयोजन में शामिल होंगे। हाल ही में, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के प्रयागराज आने की चर्चा तेज हुई थी। यह कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों नेता फरवरी के पहले सप्ताह में महाकुंभ में स्नान करने आ सकते हैं, लेकिन अभी तक कांग्रेस पार्टी की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
अखिलेश यादव का महाकुंभ (Maha Kumbh 2025) में पहुंचना, खासकर उनके द्वारा अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन समारोह में शामिल न होने और यूपी विधानसभा अध्यक्ष के राम मंदिर दर्शन के कार्यक्रम से भी दूरी बनाने के बाद और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। भाजपा ने अखिलेश यादव पर इस फैसले को लेकर जमकर हमला बोला था और सपा के अंदर भी इस पर असहमति देखी गई थी। लेकिन अब अखिलेश यादव का महाकुंभ में पहुंचना, खासतौर से भाजपा के सॉफ्ट हिंदुत्व की आलोचना करने का एक तरीका माना जा सकता है।


