New Liquor Policy: उत्तर प्रदेश में लागू की गई नई शराब नीति राज्य सरकार के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा लाई गई इस नीति के तहत अप्रैल महीने में ही आबकारी विभाग ने बीते वर्ष की तुलना में 1006 करोड़ रुपये अधिक का राजस्व अर्जित किया है। यह आय बीयर, इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) और देशी शराब की बढ़ी हुई बिक्री से हुई है।
राजस्व में रिकॉर्ड वृद्धि
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 में आबकारी विभाग को कुल 4319 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जबकि अप्रैल 2024 में यह आंकड़ा 3313 करोड़ रुपये था। यानी महज एक महीने में ही सरकार को 30 प्रतिशत की साल-दर-साल वृद्धि के साथ 1006 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है।
मिश्रित दुकानों और सस्ती लाइसेंस नीति का असर
नई शराब नीति के अंतर्गत सरकार ने बीयर और शराब की मिश्रित दुकानें शुरू करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही, कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों को बेचने के लिए कम शुल्क पर लाइसेंस की पेशकश की गई। इससे दुकानदारों को अधिक सुविधा मिली और बाजार में विकल्पों की संख्या बढ़ी, जिससे बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
व्यापार में सहूलियत और अवैध शराब पर सख्ती का असर
आबकारी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, व्यापारियों को सुविधा देने के लिए कई जटिलताओं को खत्म किया गया है। इसके अलावा, अवैध शराब के खिलाफ लगातार चल रही सख्त कार्रवाई का भी सीधा असर राजस्व पर पड़ा है। अवैध व्यापार में कमी आने से कानूनी बिक्री बढ़ी है, जिससे सरकार को सीधा लाभ मिला है।
आबकारी मंत्री का बयान
प्रदेश के आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, “राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में आबकारी विभाग की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। नई नीति के तहत उठाए गए कदमों से हमें उम्मीद से ज्यादा सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।”
आगे भी जारी रहेगा सुधार का सिलसिला
सरकार और आबकारी विभाग इस सफलता को देखते हुए नीति में और सुधार करने की योजना बना रहे हैं ताकि आने वाले महीनों में राजस्व वृद्धि का यह सिलसिला बरकरार रखा जा सके। वर्ष 2025-26 के शुरुआती महीने से ही मिले सकारात्मक संकेतों से यह स्पष्ट है कि सरकार की नई रणनीति से न सिर्फ व्यापार को बल मिला है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।


