Sambhal News : संभल हिंसा मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान बर्क को गिरफ्तारी का डर सता रहा है। इस डर से बचने के लिए उन्होंने प्रयागराज हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। अपनी याचिका में उन्होंने एफआईआर को खारिज करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की है। संभल हिंसा के मामले में पुलिस ने जिया उर रहमान बर्क को मुख्य आरोपी बनाया है। इस मामले पर हाई कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हो सकती है।
संभल हिंसा में अब तक का घटनाक्रम
संभल हिंसा के बाद पुलिस ने अब तक 25 लोगों को गिरफ्तार किया है और 7 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इन मुकदमों में करीब 2700 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें संभल सांसद जिया उर रहमान बर्क और सपा विधायक नवाब इकबाल के बेटे सुहेल इकबाल भी नामजद हैं।
पुलिस के मुताबिक, सात एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें पांच संभल कोतवाली और दो नखासा थाने में दर्ज की गई हैं।
कैसे भड़की हिंसा?
24 नवंबर को संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर हिंसा भड़क उठी। (Sambhal News) इस हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई और 25 से अधिक लोग घायल हुए। बताया जाता है कि अदालत के आदेश पर 19 नवंबर को जामा मस्जिद का सर्वे शुरू किया गया था।
इस सर्वे को लेकर दावा किया गया कि जिस स्थान पर जामा मस्जिद है, वहां पहले हरिहर मंदिर हुआ करता था। इसके बाद 24 नवंबर को जब मस्जिद का दोबारा सर्वे किया जा रहा था, तभी हिंसा भड़क उठी। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प में चार लोगों की मौत हो गई और 25 लोग घायल हुए।
बर्क और सुहेल पर साजिश का आरोप
पुलिस ने आरोप लगाया है कि हिंसा के पीछे सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क और सपा विधायक नवाब इकबाल के बेटे सुहेल इकबाल का हाथ है। पुलिस का कहना है कि इन दोनों ने हिंसा की साजिश रची। हालांकि, सांसद बर्क का दावा है कि वह हिंसा के वक्त वहां मौजूद नहीं थे और बैंगलुरु में थे। इसके बावजूद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
जिया उर रहमान बर्क का बयान
सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने इस पूरे मामले को पुलिस की साजिश बताया है। उन्होंने कहा, “यह सब पुलिस की साजिश के तहत किया गया है। निर्दोष लोगों की हत्या के लिए पुलिस वालों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। जब सब कुछ शांति से चल रहा था, तो भीड़ लाकर नारे लगवाने की क्या जरूरत थी?”
उन्होंने यह भी कहा कि जामा मस्जिद ऐतिहासिक और पुरानी है। सुप्रीम कोर्ट के 1991 के आदेश का हवाला देते हुए बर्क ने कहा कि 1947 से सभी धार्मिक स्थल जिस स्थिति में हैं, उन्हें उसी स्थिति में रहने दिया जाए। इसके बावजूद कुछ लोग देश और प्रदेश का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
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