Sambhal News : उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक बार फिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम ने रानी की बावड़ी की जांच करने के लिए अपनी टीम भेजी है। यह बावड़ी संभल के चंदौसी इलाके में स्थित है, और यहां 5 दिन से खुदाई का काम जारी है। अभी तक 12 फीट गहरी खुदाई की जा चुकी है, लेकिन बावड़ी का तल अभी तक नहीं मिल पाया है। जितनी गहरी खुदाई की जा रही है, उतनी ही विशालकाय इमारत की संरचना दिखाई दे रही है, जो इस स्थान के ऐतिहासिक महत्व को और भी बढ़ा रही है।
ASI टीम के अधिकारी आज इस बावड़ी की जांच के लिए पहुंचे, और इस दौरान उन्होंने करीब 150 फोटो खींचे और वीडियोग्राफी भी की। टीम ने बावड़ी के अंदर जाकर इसकी स्थिति का निरीक्षण किया और वहां खुदाई में लगे मजदूरों से भी बातचीत की। माना जा रहा है कि ASI की टीम अपनी जांच पूरी करने के बाद जल्द ही इस बावड़ी के बारे में एक रिपोर्ट पेश कर सकती है।
रानी सुरेंद्र बाला की बावड़ी का ऐतिहासिक महत्व
यह बावड़ी सहसपुर की रानी सुरेंद्र बाला की बताई जाती है, जो अपने परिवार के साथ अक्सर इस बावड़ी पर आया करती थीं। रानी का परिवार दावा करता है कि रानी जब भी इस क्षेत्र में आती थीं, तो वह इसी बावड़ी में ठहरती थीं। साथ ही, रियासत के सैनिक भी यहां ठहरते थे। रानी की बावड़ी संभल के चंदौसी में स्थित है, जो पहले एक हिंदू बाहुल्य इलाका हुआ करता था। हालांकि, 1857 के बाद यह इलाका मुस्लिम बाहुल्य हो गया, और हिंदू आबादी यहां से चली गई। बाद में यह जमीन बिक गई और बावड़ी को मिट्टी से भर दिया गया।
कब्जा और खुदाई की शुरुआत
कुछ समय पहले इस बावड़ी (Sambhal News) के बारे में शिकायत आई थी कि इस पर अवैध कब्जा किया गया है और इसे पूरी तरह से दबा दिया गया है। इस शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने इस मामले को गंभीरता से लिया और खुदाई का आदेश दिया। इसके परिणामस्वरूप रानी की बावड़ी को फिर से सामने लाया गया और अब इसके ऐतिहासिक महत्व की जांच हो रही है। पिछले 5 दिनों से खुदाई का काम जारी है, और अब तक इसमें महत्वपूर्ण तथ्यों की खोज हो चुकी है।
आगे का रास्ता
अब यह देखना होगा कि ASI टीम की रिपोर्ट के बाद इस बावड़ी के बारे में और क्या नई जानकारी सामने आती है। इसके अलावा, क्या इस बावड़ी के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसे संरक्षित किया जाएगा या इसके आसपास और खुदाई की जाएगी, यह आने वाला समय ही बताएगा।


