सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाती है। भगवान शिव की भक्ति में लीन पवित्र गंगा जल लेकर सड़कों पर श्रद्धालु कतारों में खड़े देखे जा सकते हैं। इन भक्तों को प्यार से ‘भोले’ कहा जाता है। हरिद्वार में मीडिया ने ऐसे ही दो भक्तों से मुलाकात की, एक हिंदू और दूसरा मुस्लिम। उनकी भक्ति भारत की गंगा-जमुनी संस्कृति और सौहार्द का प्रमाण है। इस बीच, नेमप्लेट आदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने सावन के पहले दिन कई दुकानदारों और विक्रेताओं को राहत दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने नेमप्लेट आदेश पर रोक लगाई
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानदारों को नेमप्लेट लगाने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। इस फैसले का दुकानदारों ने स्वागत किया है और उन्होंने अपने प्रतिष्ठानों से नेमप्लेट हटाना शुरू कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश की सरकारों को नोटिस भी जारी किया है। इस मामले पर अगली सुनवाई 26 जुलाई को होनी है।
सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चर्चा के बिंदुओं पर विचार करते हुए, निर्देशों के क्रियान्वयन पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश जारी करना उचित समझा। कोर्ट ने कहा कि ढाबा मालिकों, फल विक्रेताओं और फेरीवालों सहित खाद्य विक्रेताओं को अपने द्वारा बेचे जा रहे खाद्य पदार्थों के प्रकार को प्रदर्शित करने की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन उन्हें मालिकों की पहचान का खुलासा करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकारों को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि यदि याचिकाकर्ताओं में अन्य राज्य शामिल हैं, तो उन राज्यों को भी नोटिस जारी किए जाएंगे।
हर्ष और सलमान: एकता के प्रतीक
आज तक ने हरिद्वार में कांवड़ ले जाने वाले दो भक्तों हर्ष कटारिया और मोहम्मद सलमान से बात की, जो दोनों दिल्ली से हैं। सलमान ने बताया कि वह शिव मंदिर में पवित्र जल चढ़ाएंगे और उनके परिवार और समुदाय को उनके मंदिर जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। हर्ष ने बताया कि वह सलमान के साथ मस्जिद भी जाते हैं। हर्ष ने कांवड़ की सभी परंपराओं का पालन करने के लिए सलमान की प्रशंसा की। नेमप्लेट विवाद के बारे में दोनों ने कहा कि वे ढाबों पर खाना खाते समय भेदभाव नहीं करते। वे सिर्फ यह पूछते हैं कि खाने में लहसुन और प्याज तो नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि सलमान भी इस दौरान अपने दोस्तों के साथ लहसुन और प्याज से परहेज कर रहे हैं।
विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विपक्ष ने सरकार की आलोचना की है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, “जब मैंने पहली बार इसके बारे में सुना तो मैंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस पर संज्ञान लेना चाहिए और इस तरह की कार्रवाई को रोकना चाहिए। यह सांप्रदायिक राजनीति की आखिरी झलक है और इस तरह के फैसले इसलिए लिए जा रहे हैं क्योंकि यह खत्म हो रही है। सांप्रदायिक राजनीति के खत्म होने से भाजपा परेशान है।”
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान किया जाना चाहिए। हिटलर ने जो किया, वही आप यहां कर रहे हैं। यह देश धर्म से चलेगा या संविधान से? सरकार सभी समुदायों की है, सिर्फ एक की नहीं।”
नेमप्लेट विवाद
पिछले हफ्ते मुजफ्फरनगर पुलिस ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर सभी भोजनालयों को अपने मालिकों के नाम प्रदर्शित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद, योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने इस आदेश को पूरे राज्य में लागू किया और उत्तराखंड सरकार ने भी इसी तरह का निर्देश जारी किया। योगी सरकार के इस कदम की न केवल विपक्ष ने बल्कि एनडीए के सहयोगी दलों जेडी(यू) और आरएलडी समेत अन्य ने भी आलोचना की।


