UP SIR: यूपी में चल रही SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। आपको बता दें कि इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी और बीजेपी आमने-सामने आ गई हैं। 10 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने SIR प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं को पहले से कैसे पता है कि कितने मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटने वाले हैं। अखिलेश यादव ने इसे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता से जोड़ते हुए गंभीर चिंता जताई।
आरपी सिंह का पलटवार
अखिलेश यादव के बयान पर बीजेपी नेता आरपी सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया और कहा कि ऐसे बयान इस बात का संकेत हैं कि समाजवादी पार्टी का जनाधार खत्म हो चुका है।
आरपी सिंह ने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी को वाकई जनता का समर्थन हासिल है, तो उनके विधायक उन मतदाताओं के लिए फॉर्म 6 और 7 भरें, जिनके नाम कथित तौर पर वोटर लिस्ट से कटे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई मतदाता जीवित है या किसी और जगह शिफ्ट हो गया है, तो यह बात तथ्यों के साथ सामने लाई जानी चाहिए, न कि सिर्फ आरोप लगाए जाएं।
चुनाव आयोग पर सवाल राजनीति से प्रेरित
आरपी सिंह ने चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक दायरे में होती है और उस पर सवाल उठाना केवल राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है। उनके मुताबिक इस तरह के बयान जनता को गुमराह करने के लिए दिए जा रहे हैं।
राम मंदिर में नमाज की कोशिश पर सख्त रुख
इसके अलावा, अयोध्या के राम मंदिर परिसर में नमाज पढ़ने की कोशिश के आरोप में हिरासत में लिए गए कश्मीरी युवक के मामले पर भी आरपी सिंह ने कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह घटना जानबूझकर की गई शरारत लगती है और इसकी गहन जांच होनी चाहिए।
आरपी सिंह ने कहा कि यह पता लगाना जरूरी है कि ऐसे कृत्यों के पीछे कौन लोग हैं और कौन समाज में शांति और सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। कुल मिलाकर SIR प्रक्रिया को लेकर यूपी की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और बढ़ने की संभावना है।
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