Farmers Protest : हजारों किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नोएडा से दिल्ली की ओर कूच कर रहे थे, लेकिन उन्हें दलित प्रेरणा स्थल पर रोक लिया गया। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के साथ लंबी बातचीत के बाद किसानों ने यह तय किया कि वे फिलहाल प्रेरणा स्थल के अंदर ही अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे। इस कदम के बाद दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर लगाए गए बैरिकेड्स हटा दिए गए हैं।
किसान नेता का बड़ा बयान
भारतीय किसान यूनियन के नेता चौधरी बी. सी. प्रधान ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि प्रशासन से बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया कि किसान प्रेरणा स्थल पर अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं, तो किसान एक बार फिर दिल्ली कूच करेंगे। इस बार यह आर-पार की लड़ाई होगी।
प्रशासन का आश्वासन और किसानों का फैसला
किसान नेताओं को जिला प्रशासन, नोएडा प्राधिकरण और यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को यूपी के मुख्य सचिव तक पहुंचाया जा रहा है। इस बीच, किसानों से कहा गया कि वे सड़क पर न रुकें और दलित प्रेरणा स्थल पर जाकर प्रदर्शन करें। किसान नेताओं ने यह बात मान ली और प्रेरणा स्थल पर जाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
सुरक्षा के इंतजाम
किसानों के आंदोलन को देखते हुए सुरक्षा के मद्देनजर 5,000 जवानों की तैनाती की गई थी। 1,000 PAC के जवानों को तैनात किया गया था। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए वाटर कैनन, वज्र वाहन, और टीयर गैस जैसे उपकरण भी तैयार रखे गए थे। नोएडा पुलिस के एडिशनल कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर शिव हरी ने बताया कि लोगों को ट्रैफिक में परेशानियों से बचाने के लिए रविवार को ही वैकल्पिक मार्गों के साथ डायवर्सन रूट और एडवाइजरी जारी की गई थी।
किसान आंदोलन की मुख्य मांगें
किसान संगठनों का कहना है कि वे महामाया फ्लाईओवर से होते हुए दिल्ली जाएंगे और संसद का घेराव करेंगे। किसानों का आरोप है कि उनकी मांगों को बहुत समय से नजरअंदाज किया जा रहा है, और वे लगातार विभिन्न अधिकारियों के सामने धरना दे रहे थे। रविवार को भी कई घंटों की बातचीत असफल रही, जिसके बाद किसानों ने दिल्ली कूच करने का फैसला लिया। किसानों की प्रमुख मांगों में बढ़ा हुआ मुआवजा और अधिकृत की गई जमीन में से 10% विकसित जमीन देने की मांग शामिल है।
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